
पटना : राज्य से गुजरने वाले करीब 6300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) अब पूरी तरह यातायात पुलिस की निगरानी में आने वाले हैं। सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई के लिए यातायात पुलिस को इसी महीने 58 नए इंटरसेप्टर वाहन मिलने जा रहे हैं। इन वाहनों की तैनाती के बाद राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत हो जाएगी।
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में 61 इंटरसेप्टर वाहन करीब 3000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों पर गश्ती और निगरानी का काम कर रहे हैं। नए 58 वाहनों के शामिल होने के बाद एनएच के बाकी हिस्सों पर भी यातायात पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित हो सकेगी।
हर 50 किलोमीटर पर तैनात होगा इंटरसेप्टर वाहन
यातायात पुलिस की योजना के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रत्येक 50 किलोमीटर के दायरे में एक इंटरसेप्टर वाहन तैनात किया जाएगा। इन वाहनों में आधुनिक उपकरण लगे होंगे, जिनकी मदद से तेज रफ्तार वाहनों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी।
इंटरसेप्टर वाहनों की मदद से ओवरस्पीडिंग, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर नजर रखी जाएगी। पुलिस का मानना है कि नियमित निगरानी बढ़ने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
सड़क हादसों में एनएच की हिस्सेदारी अधिक
राज्य में हर साल औसतन करीब 12 हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से 40 से 45 प्रतिशत हादसे केवल राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रहे हैं। तेज रफ्तार वाहन इन दुर्घटनाओं की बड़ी वजहों में शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की गति अधिक होती है और कई जगह लंबी दूरी के यातायात के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। खासकर रात के समय तेज रफ्तार, लापरवाही से ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी हादसों का कारण बनती है।
ओवरस्पीडिंग पर लगेगी लगाम
यातायात पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि नए इंटरसेप्टर वाहनों के आने से ओवरस्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। इन वाहनों की मदद से सड़क पर चल रहे वाहनों की गति की जांच की जाएगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं बल्कि वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगे वाहन
नए इंटरसेप्टर वाहनों में स्पीड मापने वाले उपकरण समेत अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे पुलिसकर्मियों को मौके पर ही नियम उल्लंघन की पहचान करने में मदद मिलेगी।
इन वाहनों को ऐसे स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है या जहां तेज रफ्तार वाहनों की शिकायतें लगातार सामने आती हैं। पुलिस विभाग दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी की योजना भी बना रहा है।
गश्ती व्यवस्था होगी मजबूत
अभी कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीमित संख्या में गश्ती वाहन होने के कारण लगातार निगरानी में परेशानी आती थी। नए वाहनों के मिलने के बाद पुलिस की पहुंच बढ़ेगी और किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
अधिकारियों के अनुसार, इंटरसेप्टर वाहनों की तैनाती से सड़क पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे वाहन चालकों में नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम
राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हर साल हजारों लोगों की जान सड़क हादसों में चली जाती है। ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यातायात पुलिस का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी, नियमित गश्त और नियमों का सख्ती से पालन कराने से दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
58 नए इंटरसेप्टर वाहनों के आने के बाद राज्य के करीब 6300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात पुलिस की निगरानी व्यवस्था पूरी हो जाएगी। अब हर 50 किलोमीटर के दायरे में पुलिस की नजर रहने से तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।





