बिहार

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का बाघ लगातार बदल रहा ठिकाना, वन विभाग अलर्ट

Ashish verma
12 July 2026 9:05 PM IST
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का बाघ लगातार बदल रहा ठिकाना, वन विभाग अलर्ट
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रामनगर (पश्चिम चंपारण)। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंचा एक बाघ इन दिनों पश्चिम चंपारण के ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का कारण बना हुआ है। बाघ लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है, जिसके कारण वन विभाग की टीम को उसकी निगरानी और लोकेशन ट्रैक करने में लगातार मशक्कत करनी पड़ रही है।

बाघ की मौजूदगी से इलाके के किसानों और ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोग खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं। हालांकि, वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में कैंप कर रही है और बाघ की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

वन विभाग के अनुसार, बाघ का नया लोकेशन अब नगर क्षेत्र के सबुनी सरेह में मिला है। रविवार को भी वन कर्मी बाघ के पगमार्क और अन्य संकेतों के आधार पर उसकी तलाश में जुटे रहे। बारिश के कारण पगचिह्न तलाशने में वन कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले बाघ की मौजूदगी धनरपा गांव के पश्चिमी हिस्से में मसान नदी के पास मिली थी। यहां वन विभाग की टीम को बाघ के पैरों के निशान मिले थे। इसके बाद बाघ ने अपना स्थान बदला और उसका लोकेशन भावल गांव के पश्चिमी क्षेत्र में मिला।

इसके बाद भावल गांव के पूर्वी हिस्से में रामरेखा नदी के किनारे भी बाघ के पगमार्क पाए गए। वन विभाग की टीम ने इन संकेतों के आधार पर बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू किया। शनिवार को बाघ का लोकेशन बंजरिया सरेह क्षेत्र में पाया गया था, जबकि रविवार को उसके सबुनी सरेह की ओर जाने की जानकारी मिली।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ लगातार क्षेत्र बदल रहा है, लेकिन टीम उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है।

ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अकेले खेतों की ओर न जाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। साथ ही बाघ को परेशान करने या उसके करीब जाने से बचने की अपील भी की गई है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। कई लोग डर के कारण खेतों में जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग जल्द से जल्द बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल क्षेत्र में वापस पहुंचाए।

वीटीआर से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों का आना पहले भी देखा गया है। जंगल क्षेत्र के आसपास बसे गांवों में अक्सर जंगली जानवरों की गतिविधियां सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग की प्राथमिकता जानवर और इंसानों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है।

फिलहाल वन विभाग की टीम सबुनी सरेह समेत आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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