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चुनावी खर्च पर आयोग की पैनी नजर, तीन चरणों में होगी जांच
Bihar : बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च की निगरानी के लिए व्यापक व्यवस्था की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्याशियों के चुनावी व्यय की तीन चरणों में जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी उम्मीदवार निर्धारित व्यय सीमा का उल्लंघन न करे और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहे।
चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव में धनबल के प्रभाव को नियंत्रित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। इसी कारण इस बार व्यय निगरानी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाया गया है।
तीन चरणों में होगी चुनावी खर्च की जांच
निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों द्वारा किए जा रहे चुनावी खर्च की जांच को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा है। प्रत्येक चरण में उम्मीदवारों को अपने खर्च का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रारंभिक व्यय का परीक्षण।
प्रचार अभियान के अंतिम चरण में खर्च का विस्तृत सत्यापन।
मतदान के बाद अंतिम व्यय विवरण की जांच और मिलान।
इन तीनों चरणों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों, बिलों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का मिलान आयोग द्वारा तैयार किए गए स्वतंत्र रिकॉर्ड से किया जाएगा।
व्यय प्रेक्षकों की रहेगी विशेष नजर
चुनाव आयोग ने व्यय निगरानी के लिए विशेष व्यय प्रेक्षक (Expenditure Observer) और निगरानी टीमों की तैनाती की है। ये टीमें चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों की सभाओं, रैलियों, रोड शो, प्रचार सामग्री, वाहनों और अन्य चुनावी गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगी।
इसके अलावा वीडियो निगरानी दल, फ्लाइंग स्क्वॉड, स्थैतिक निगरानी दल और लेखा टीम भी चुनावी खर्च से जुड़े प्रत्येक पहलू का रिकॉर्ड तैयार करेंगे।
हर खर्च का देना होगा हिसाब
प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव प्रचार में किए गए सभी खर्च का पूरा लेखा-जोखा रखना होगा। इसमें शामिल होंगे—
जनसभाओं और रैलियों का खर्च।
प्रचार वाहनों का उपयोग।
पोस्टर, बैनर और होर्डिंग।
पंपलेट, प्रचार सामग्री और विज्ञापन।
सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्रचार।
लाउडस्पीकर, मंच और टेंट की व्यवस्था।
कार्यकर्ताओं के लिए की गई व्यवस्थाएं।
निर्धारित प्रारूप में सभी खर्च का विवरण समय-समय पर निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आयोग करेगा स्वतंत्र सत्यापन
चुनाव आयोग केवल उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए खर्च के विवरण पर ही निर्भर नहीं रहेगा। निगरानी टीमें स्वतंत्र रूप से भी प्रचार कार्यक्रमों का आकलन करेंगी और उनके संभावित खर्च का अनुमान तैयार करेंगी।
यदि किसी उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत व्यय विवरण और आयोग के आकलन में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित प्रत्याशी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
नकदी और अवैध प्रलोभनों पर भी नजर
उपचुनाव के दौरान नकदी, शराब, उपहार या मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी भी प्रकार के अवैध वितरण पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए विभिन्न जांच एजेंसियां और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
सीमा क्षेत्रों, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष जांच अभियान चलाए जाएंगे ताकि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
डिजिटल प्रचार भी निगरानी के दायरे में
चुनाव प्रचार के बदलते स्वरूप को देखते हुए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले प्रचार खर्च को भी व्यय विवरण में शामिल करना होगा। ऑनलाइन विज्ञापन, प्रायोजित पोस्ट और अन्य डिजिटल प्रचार गतिविधियों की भी निगरानी की जाएगी।
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी माध्यम से किए गए प्रचार का सही लेखा-जोखा दर्ज हो।
पारदर्शिता पर आयोग का जोर
चुनाव आयोग ने सभी प्रत्याशियों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और समय पर व्यय रजिस्टर अपडेट करते रहें। अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से व्यय रजिस्टर का निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यकतानुसार अभिलेखों का सत्यापन भी किया जाएगा।
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर उपलब्ध कराना आयोग की प्राथमिकता है।
मतदाताओं से भी सहयोग की अपील
आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उन्हें चुनाव के दौरान धन, उपहार या किसी अन्य प्रकार के प्रलोभन दिए जाने की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित निर्वाचन अधिकारियों या हेल्पलाइन पर दें। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से चुनाव को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
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