बिहार

कुत्ते के काटने की बात परिवार से छिपाई, पानी देखते ही गुर्राने लगा युवक; अस्पताल में कराया भर्ती

Kavita2
23 Sept 2026 2:42 PM IST
कुत्ते के काटने की बात परिवार से छिपाई, पानी देखते ही गुर्राने लगा युवक; अस्पताल में कराया भर्ती
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सासनी। कुत्ते के काटने की घटना परिवार से छिपाना गांव सहजपुरा निवासी 30 वर्षीय युवक के लिए भारी पड़ गया। कुछ दिन बाद मंगलवार तड़के अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक युवक अजीब व्यवहार करने लगा और पानी सामने आते ही गुर्राने जैसी प्रतिक्रिया देने लगा। उसकी हालत देखकर परिवार के लोग घबरा गए और तत्काल उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने भर्ती कर उपचार शुरू किया।

युवक की पहचान गांव सहजपुरा निवासी 30 वर्षीय महेश कुमार के रूप में हुई है। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता है और अविवाहित है। परिजनों के अनुसार कुछ दिन पहले उसे एक कुत्ते ने काट लिया था, लेकिन उसने इसकी जानकारी घर में किसी को नहीं दी थी।

परिवार को यह भी नहीं पता कि महेश को कुत्ते ने किस दिन और किन परिस्थितियों में काटा था। तबीयत बिगड़ने के बाद जब पूरे मामले की जानकारी सामने आई तो परिजन भी हैरान रह गए।

मंगलवार तड़के अचानक बिगड़ी हालत

परिजनों के अनुसार मंगलवार तड़के महेश की हालत अचानक खराब होने लगी। शुरुआत में परिवार के लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर उसे क्या हुआ है।

कुछ समय बाद उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था और अजीबोगरीब हरकतें करने लगा। पानी सामने आने पर उसकी प्रतिक्रिया देखकर परिवार के सदस्य और ज्यादा घबरा गए।

इसके बाद परिजनों ने समय गंवाए बिना उसे अस्पताल ले जाने का फैसला किया।

पानी देखकर असामान्य प्रतिक्रिया

परिवार का कहना है कि महेश पानी सामने आते ही गुर्राने जैसी प्रतिक्रिया देने लगा था। इस तरह के लक्षणों को गंभीरता से लेते हुए उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

चिकित्सकों ने युवक को भर्ती कर उसका उपचार शुरू किया। युवक में दिखाई दे रहे लक्षणों की वास्तविक चिकित्सकीय वजह और उसकी स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष डॉक्टरों की जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

कुत्ते के काटने और पानी से असामान्य प्रतिक्रिया जैसे लक्षणों को देखते हुए रेबीज की आशंका गंभीर मानी जाती है, लेकिन किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर ही की जानी चाहिए।

परिवार को नहीं बताई थी कुत्ते के काटने की बात

महेश के परिजनों के मुताबिक कुछ दिन पहले उसे कुत्ते ने काट लिया था। इसके बावजूद उसने घटना की जानकारी घर के किसी सदस्य को नहीं दी।

यही वजह रही कि परिवार के लोग समय रहते उसे चिकित्सक के पास नहीं ले जा सके। उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि कुत्ते ने महेश को किस तारीख को काटा था।

इस कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि घटना और तबीयत बिगड़ने के बीच कितना समय बीता।

मजदूरी करता है युवक

30 वर्षीय महेश कुमार गांव सहजपुरा का रहने वाला है और मेहनत-मजदूरी करता है। वह अविवाहित है और परिवार के साथ रहता है।

अचानक उसकी तबीयत खराब होने और व्यवहार में बदलाव आने से परिवार में चिंता का माहौल है। परिजन उसके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।

अस्पताल में डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और आवश्यक उपचार किया जा रहा है।

कुत्ते के काटने को हल्के में लेना खतरनाक

कुत्ते के काटने की किसी भी घटना को सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुत्ता पालतू हो या आवारा, काटने या खरोंच लगने की स्थिति में जल्द से जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कुत्ते के काटने के बाद रेबीज संक्रमण का खतरा हो सकता है। समय रहते सही उपचार और टीकाकरण इस खतरे से बचाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए ऐसी घटना होने पर उसे परिवार से छिपाने या घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए।

घाव को तुरंत धोना जरूरी

कुत्ता या अन्य संदिग्ध जानवर काट ले तो घाव को तत्काल साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना महत्वपूर्ण प्राथमिक कदम माना जाता है। इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर घाव की प्रकृति और संपर्क की गंभीरता के आधार पर एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन देने का निर्णय लेते हैं।

टीकाकरण कब और कितनी खुराक में किया जाना है, इसका फैसला चिकित्सक की सलाह के अनुसार होना चाहिए।

लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए

रेबीज के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुत्ते के काटने के बाद लक्षण आने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। संभावित संक्रमण के बाद समय पर पोस्ट-एक्सपोजर उपचार लेना जरूरी होता है।

अगर किसी व्यक्ति को जानवर काटता या खरोंचता है तो वह घटना तुरंत अपने परिवार को बताए और स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

कई बार चोट छोटी दिखाई देती है और व्यक्ति उसे गंभीर नहीं मानता, लेकिन ऐसी लापरवाही जोखिम बढ़ा सकती है।

बच्चों और युवाओं को भी करें जागरूक

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में परिवार के सभी सदस्यों, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि कुत्ते के काटने की बात कभी नहीं छिपानी चाहिए।

कई बार डर या डांट के कारण बच्चे घटना की जानकारी परिवार को नहीं देते। ऐसे मामलों में उपचार में देरी हो सकती है।

परिजनों को भी बच्चों के शरीर पर किसी जानवर के काटने या खरोंच के निशान दिखाई देने पर तुरंत जानकारी लेनी चाहिए।

समय पर उपचार सबसे जरूरी

सहजपुरा की इस घटना ने एक बार फिर कुत्ते के काटने के बाद समय पर चिकित्सा लेने की अहमियत सामने ला दी है। महेश ने कथित तौर पर घटना की जानकारी परिवार को नहीं दी और कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

फिलहाल युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। उसकी स्वास्थ्य स्थिति और लक्षणों की वास्तविक वजह के संबंध में चिकित्सकों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

घटना से सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि कुत्ते या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। घाव को तुरंत अच्छी तरह धोने के साथ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक एंटी-रेबीज उपचार लेना चाहिए।

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