बिहार

650 छात्रों को हर महीने सरकार देगी ₹15000, शोध को मिलेगा बढ़ावा

Saba Naaz
2 Aug 2026 8:33 PM IST
650 छात्रों को हर महीने सरकार देगी ₹15000, शोध को मिलेगा बढ़ावा
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पटना। बिहार सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा और शोध को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डाक्टरल फेलोशिप योजना लागू की जा रही है। इस योजना के तहत हर साल 650 शोधार्थियों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। चयनित पीएचडी छात्रों को तीन वर्षों तक हर महीने 15 हजार रुपये की फेलोशिप मिलेगी।

राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य शोधार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना और उन्हें नए विषयों पर शोध एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डाक्टरल फेलोशिप योजना को राज्य के सभी 17 विश्वविद्यालयों और चार प्रमुख शोध संस्थानों में लागू करने की तैयारी चल रही है। योजना के प्रस्ताव को जल्द ही विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति के सामने रखा जाएगा। समिति की अनुशंसा के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

इस योजना के लिए करीब 11 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित की गई है। सरकार का कहना है कि भविष्य में जरूरत के अनुसार फेलोशिप राशि में बढ़ोतरी भी की जा सकती है। योजना के माध्यम से बिहार में शोध की गुणवत्ता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

फेलोशिप के तहत अलग-अलग विषयों के शोधार्थियों को शामिल किया जाएगा। विज्ञान विषय में 200, सामाजिक विज्ञान में 225, मानविकी और भाषा विज्ञान में 125, कृषि और पशु विज्ञान में 30-30 तथा वाणिज्य, शिक्षा, विधि और अन्य विषयों में 100 शोधार्थियों का चयन किया जाएगा।

सरकार ने योजना को पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए एक संचालन समिति का गठन करने का फैसला लिया है। विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में विश्वविद्यालयों के कुलपति, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी, बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शिक्षाविद शामिल होंगे। यही समिति शोधार्थियों के चयन और फेलोशिप देने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

इस योजना में चयन के लिए शोधार्थियों की अधिकतम उम्र सीमा 31 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि महिला, दिव्यांग और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उम्र सीमा में पांच वर्ष की छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से पूरी की जाएगी। प्राप्त आवेदनों की समीक्षा शिक्षाविदों और शोध विशेषज्ञों की समिति करेगी।

फेलोशिप के लिए पहली श्रेणी में उन शोधार्थियों को शामिल किया जाएगा जिन्होंने नेट, सीएसआईआर-यूजीसी या आईसीएआर जैसी परीक्षाओं को पास करने के बाद पीएचडी में नामांकन लिया है। ऐसे छात्रों को हर महीने 15 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं दूसरी श्रेणी में पीएचडी के लिए नेट उत्तीर्ण छात्रों को रखा जाएगा, जिन्हें आठ हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाएगी।

शोध कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रिसर्च प्रोग्रेस मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई जाएगी। यह समिति समय-समय पर शोधार्थियों के काम की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि फेलोशिप का सही उपयोग हो रहा है।

योजना में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय सहित राज्य के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से बिहार के युवाओं को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में नई खोज और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य शोधार्थियों के ज्ञान और क्षमता का उपयोग राज्य की नीतियों, विकास योजनाओं और सुशासन को बेहतर बनाने में करना भी है।

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