
देवघर। पटना, जमुई, झाझा, बांका, भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र के लाखों रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रेल ने कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच लगभग पांच किलोमीटर लंबी नई रेल बाईपास लाइन का निर्माण पूरा कर लिया है। करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के शुरू होने से यात्रियों का सफर अधिक सुगम और तेज होने की उम्मीद है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त की मंजूरी मिलने के बाद इस नए रेलखंड पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा।
गुरुवार को पूर्वी सर्किल कोलकाता के रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने नई रेल लाइन का विस्तृत संरक्षा निरीक्षण किया। सीआरएस और रेलवे अधिकारियों की टीम ने मोटर ट्रॉली के माध्यम से करीब पांच किलोमीटर लंबे पूरे ट्रैक का निरीक्षण किया। इस दौरान पटरी की स्थिति, सिग्नलिंग व्यवस्था, रेल लाइन की संरचना और परिचालन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान रेलवे की अत्याधुनिक ओएमएस-2000 यानी ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम तकनीक का भी प्रयोग किया गया। इस प्रणाली के माध्यम से ट्रैक पर ट्रेन के चलने के दौरान होने वाले कंपन, स्थिरता और संतुलन का तकनीकी आकलन किया जाता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि पटरी निर्धारित गति से ट्रेन चलाने के लिए सुरक्षित है या नहीं।
स्पीड ट्रायल के दौरान ट्रैक की मजबूती और परिचालन क्षमता को परखा गया। इसके साथ सिग्नलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली की भी जांच की गई। अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर रेल लाइन से जुड़े उपकरणों, सिग्नलों और सुरक्षा प्रबंधों का निरीक्षण किया। रेलवे सुरक्षा आयुक्त की टीम ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि नियमित संचालन शुरू होने से पहले सभी जरूरी मानकों का पालन किया गया है।
जानकारी के अनुसार नया रेलखंड प्रारंभिक परीक्षण में आवश्यक तकनीकी मानकों पर खरा उतरा है। अब रेलवे सुरक्षा आयुक्त की ओर से अंतिम सुरक्षा क्लीयरेंस मिलने की औपचारिकता शेष है। मंजूरी मिलने के बाद रेलवे इस लाइन पर नियमित ट्रेनों के संचालन की तारीख घोषित कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार सितंबर के अंत तक इस रेलखंड पर परिचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच बनाई गई बाईपास लाइन को क्षेत्रीय रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके शुरू होने से कई ट्रेनों को मौजूदा मार्ग पर लगने वाले अतिरिक्त समय से राहत मिल सकती है। रेल यातायात का दबाव कम होने और ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने की संभावना है।
पटना, जमुई, झाझा, बांका, भागलपुर और मुंगेर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यात्री देवघर आते-जाते हैं। देवघर प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र होने के कारण पूरे वर्ष यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। श्रावणी मेले और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में नई बाईपास लाइन रेल परिचालन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रेलवे की इस परियोजना पर करीब 293 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पांच किलोमीटर लंबे रेलखंड के निर्माण में पटरियों, सिग्नलिंग प्रणाली, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक ढांचागत सुविधाओं को विकसित किया गया है। परियोजना का उद्देश्य रेल संपर्क को बेहतर बनाने के साथ ट्रेनों के संचालन में लगने वाले समय को कम करना है।
नई रेल लाइन से यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ तभी मिलेगा जब नियमित ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा। सीआरएस की मंजूरी से पहले रेलवे सभी तकनीकी कमियों को दूर करेगा। यदि निरीक्षण के दौरान किसी सुधार की आवश्यकता बताई जाती है तो संबंधित विभाग उसे पूरा करेगा। उसके बाद अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत कर सुरक्षा संबंधी अनुमति प्राप्त की जाएगी।
रेलवे में किसी नई लाइन पर यात्री ट्रेन चलाने से पहले रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण आवश्यक होता है। सीआरएस ट्रैक, सिग्नल, पुल, क्रॉसिंग और अन्य संरचनाओं का परीक्षण करने के बाद तय करते हैं कि नया रेलखंड यात्रियों के लिए सुरक्षित है या नहीं। इसी कारण निर्माण पूरा होने के बाद भी औपचारिक सुरक्षा मंजूरी मिलने तक नियमित परिचालन शुरू नहीं किया जाता।
ओएमएस-2000 तकनीक के माध्यम से किए गए परीक्षण को इस परियोजना का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। यह प्रणाली ट्रैक की गुणवत्ता का वैज्ञानिक विश्लेषण करती है। इसमें रेल लाइन पर होने वाले कंपन और झटकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। यदि कंपन निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है तो उस हिस्से में सुधार कराया जाता है। इससे ट्रेनों की यात्रा सुरक्षित होने के साथ यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक भी बनती है।
स्पीड ट्रायल के माध्यम से यह जांच की गई कि नई लाइन पर निर्धारित गति से ट्रेन चलाए जाने पर ट्रैक किस प्रकार प्रतिक्रिया करता है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर इस रेलखंड के लिए सुरक्षित गति तय की जा सकती है। शुरुआत में ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाने की अनुमति मिलने और बाद में स्थितियों के अनुसार गति बढ़ाए जाने की संभावना रहती है।
नई बाईपास लाइन से ट्रेनों के समय पालन में भी सुधार होने की उम्मीद है। व्यस्त रेलखंडों पर ट्रेनों को रास्ता देने के लिए कई बार स्टेशनों या आउटर सिग्नल पर रोकना पड़ता है। वैकल्पिक लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ स्थानीय यात्रियों को भी लाभ मिल सकता है।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह रेल परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में लोगों और सामान की आवाजाही आसान होगी। पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी इसका फायदा मिलने की संभावना है। देवघर आने वाले यात्रियों की यात्रा का समय कम होने से क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
परियोजना का निर्माण पूरा होने और सीआरएस निरीक्षण के बाद अब यात्रियों को अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आवश्यक हरी झंडी मिलने पर सितंबर के अंत तक ट्रेनों का नियमित संचालन शुरू किया जा सकता है। हालांकि परिचालन की अंतिम तारीख रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक बनी यह पांच किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन स्थानीय रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। करीब 293 करोड़ रुपये की इस परियोजना से कई क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक रेल सेवा मिलने की उम्मीद है। अब रेलवे सुरक्षा आयुक्त की अंतिम मंजूरी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संचालन का रास्ता खोलेगी।





