बिहार

अंग्रेजों के दौर की तेतरिया कोठी अब खंडहर बनी

Saba Naaz
5 July 2026 5:31 PM IST
अंग्रेजों के दौर की तेतरिया कोठी अब खंडहर बनी
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Bihar: पूर्वी चंपारण जिले के तेतरिया प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक तेतरिया कोठी आज भले ही जर्जर हालत में पहुंच चुकी हो, लेकिन इसका इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। यह कोठी कभी राजाओं, जमींदारों और ब्रिटिश अधिकारियों का प्रमुख ठिकाना हुआ करती थी। चंपारण सत्याग्रह और नील आंदोलन से जुड़ी यह इमारत आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण संरक्षण की बाट जोह रही है।

स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के अनुसार, तेतरिया कोठी का निर्माण 20वीं सदी की शुरुआत में अतीत मियां द्वारा कराया गया था। उस समय यह क्षेत्र शिवहर दरबार के अधीन आता था। राजा-महाराजा और बड़े जमींदार जब भी इस इलाके में आते थे, तो इसी कोठी में ठहरते थे। बाद में अंग्रेजी शासन के दौरान इस भवन पर नियंत्रण कर लिया गया और इसे नील की खेती और उसके प्रबंधन के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।

अंग्रेजों के समय इस क्षेत्र में ‘तीन कठिया प्रथा’ लागू की गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी जमीन के एक हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था। इस व्यवस्था ने किसानों पर भारी आर्थिक और सामाजिक दबाव डाला और व्यापक शोषण हुआ। इसी शोषण के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह की नींव पड़ी, जिसमें महात्मा गांधी की भूमिका ऐतिहासिक रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तेतरिया कोठी उस दौर की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की साक्षी रही है और चंपारण आंदोलन से इसका गहरा संबंध माना जाता है। यह इमारत न केवल जमींदारी और अंग्रेजी शासन के इतिहास को दर्शाती है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि का भी हिस्सा रही है।

वर्तमान में यह ऐतिहासिक इमारत रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील होती जा रही है। दीवारें टूटने लगी हैं और संरचना कमजोर हो चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि इस धरोहर का संरक्षण किया जाए और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां चंपारण के इस गौरवशाली इतिहास को जान सकें।

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