
बिहार। भारतीय रेलवे ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) क्षेत्र में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ठाकुरगंज-चतरहाट (रंगापानी-धूमडांगी) के बीच 24.40 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और मिट्टी परीक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद इस परियोजना पर औपचारिक काम आगे बढ़ा है। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक मंजूरी और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। इससे जमीन की मजबूती, भूजल स्तर और निर्माण की तकनीकी संभावना का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा पुलों के जलमार्ग, स्टेशन यार्ड, जल निकासी व्यवस्था और ट्रैफिक से जुड़े पहलुओं का भी अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक योजना के अनुसार यह रेल लाइन ठाकुरगंज स्टेशन के उत्तर दिशा से शुरू होकर कई गांवों और क्षेत्रों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के चतरहाट तक जाएगी। इस रूट में सियालडांगा, धर्मकांटा चौक, बोड़ोबंगला, छैतनगुड़ी, योगी टोला, धापोडांगी, डुमरीडांगी, डोहाडांगी और पतीलाभाषा जैसे इलाके शामिल हैं। पतीलाभाषा घाट के पास चेंगा नदी पर नया रेलवे पुल भी बनाया जाएगा।
नई रेल लाइन बनने के बाद यह क्षेत्र में चौथा रेल कॉरिडोर होगा। इससे ठाकुरगंज को सीधे न्यू जलपाईगुड़ी मुख्य रेल मार्ग से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे न केवल यात्रियों को नया विकल्प मिलेगा बल्कि मौजूदा रेल मार्गों पर दबाव भी कम होगा। यह परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रणनीतिक महत्व को देखते हुए बेहद अहम मानी जा रही है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के पास स्थित है। इसलिए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और सेना की आवाजाही, आपूर्ति व्यवस्था, माल परिवहन तथा आपदा प्रबंधन में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। फिलहाल सर्वे कार्य जारी है और रिपोर्ट के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।





