बिहार

PM मोदी पर खड़गे की टिप्पणी को लेकर तेजस्वी यादव ने किया बचाव

Ratna Netam
26 Oct 2026 8:08 PM IST
PM मोदी पर खड़गे की टिप्पणी को लेकर तेजस्वी यादव ने किया बचाव
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पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित टिप्पणी पर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद लगातार चर्चा में है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छोटी-सी बात को बड़ा राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश की जा रही है और ‘राई का पहाड़ बनाया जा रहा है।’तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब भारतीय जनता पार्टी के नेता खड़गे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। भाजपा ने इस बयान को प्रधानमंत्री के प्रति अनुचित बताया है, जबकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक बयानों को उनके संदर्भ में समझना चाहिए।
खड़गे के समर्थन में उतरे तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक बयान को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि देश में कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर गंभीरता से चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस विवाद को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रही है। तेजस्वी के मुताबिक, राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का सिलसिला जारी रखेगा।
भाजपा ने खड़गे की टिप्पणी पर जताई नाराजगी
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक मंचों से बोलते समय राजनीतिक नेताओं को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री को लेकर की जाने वाली टिप्पणियां राजनीतिक संवाद के स्तर को प्रभावित करती हैं। पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व से इस मामले में जवाबदेही की मांग की है।हालांकि, किसी बयान की प्रकृति और उसके आशय का आकलन उसके पूरे संदर्भ के आधार पर ही किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
पटना के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 25 अक्टूबर को पटना में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से शुरू हुआ। कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खड़गे भाषण दे रहे थे। इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहीं नहीं जाएंगे।इस पर खड़गे ने मंच से जवाब देते हुए कहा, 'मोदी का बाप भी जाएगा।' उनकी इस टिप्पणी के बाद भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बताया। कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया कि टिप्पणी को उसके संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है।
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार को घेरा
तेजस्वी यादव ने पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिहार की एनडीए सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है।तेजस्वी ने कहा कि बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अपनी कथित विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए खड़गे की टिप्पणी को बड़ा मुद्दा बना रही है।
भाजपा का देशभर में विरोध प्रदर्शन
खड़गे की टिप्पणी के विरोध में भाजपा ने 26 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए। दिल्ली, पटना और बेंगलुरु सहित विभिन्न शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे की टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। वहीं, असम के मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक संवाद में शालीनता बनाए रखना आवश्यक है।
आरजेडी के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
इस विवाद पर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं की प्रतिक्रियाओं में भी अंतर देखने को मिला। जहां तेजस्वी यादव ने खड़गे का बचाव किया, वहीं आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि इतने अनुभवी नेता से इस तरह की टिप्पणी की अपेक्षा नहीं थी।मनोज झा ने राजनीतिक भाषा के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए इस विषय पर संसद में विशेष चर्चा कराने की बात कही।फिलहाल खड़गे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। तेजस्वी यादव ने सरकार से जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की है, जबकि भाजपा कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग कर रही है। इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक संवाद की मर्यादा और नेताओं की सार्वजनिक भाषा पर बहस तेज कर दी है।
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