
विशुनपुर बघनगरी। घर के नलों से पानी आने का इंतजार करते-करते ग्रामीणों का एक माह गुजर गया, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। गांव में पानी की टंकी मौजूद है, घरों तक पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है और नल भी लगाए गए हैं, इसके बावजूद करीब 500 परिवारों को नियमित जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल रहा है। मुख्य पाइपलाइन फटने के कारण पीएचईडी की नल-जल योजना पिछले करीब एक महीने से ठप पड़ी है। लगातार पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों का धैर्य रविवार को जवाब दे गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पानी टंकी परिसर पहुंचे और विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गांव में नल-जल योजना शुरू किए जाने के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब घर तक आसानी से स्वच्छ पानी पहुंच सकेगा। योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया और घर-घर पाइपलाइन भी पहुंचाई गई। कई घरों में नल लगाए जाने के बाद ग्रामीणों को लगा कि अब उन्हें पानी के लिए दूर-दराज के चापाकलों या अन्य जलस्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन मुख्य पाइपलाइन में खराबी आने के बाद पूरी व्यवस्था चरमरा गई।
ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक महीने पहले मुख्य पाइपलाइन फट गई। इसके बाद पानी की आपूर्ति बंद हो गई। शुरुआती दिनों में लोगों को उम्मीद थी कि विभाग के कर्मचारी जल्द ही खराबी को दूर कर देंगे और नल से पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू हो जाएगी। लेकिन दिन बीतते गए और समस्या जस की तस बनी रही। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विभागीय स्तर पर शिकायत किए जाने के बावजूद पाइपलाइन की मरम्मत को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजतन योजना के तहत बने संसाधन बेकार पड़े हैं और लोगों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है। नल-जल योजना बंद रहने के कारण ग्रामीणों को दूसरे जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। गर्मी और रोजमर्रा के घरेलू कामकाज के बीच पानी जुटाना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब योजना के तहत घरों तक पाइपलाइन पहुंचा दी गई है तो केवल पाइपलाइन की मरम्मत नहीं होने के कारण हजारों लीटर पानी की व्यवस्था का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
रविवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में लोग पानी टंकी परिसर में जुटे और विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि योजना पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से तत्काल पाइपलाइन की मरम्मत कराने और नियमित जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की। लोगों ने कहा कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक नियमित रूप से पानी पहुंचाना है, लेकिन यहां योजना का ढांचा तैयार होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। टंकी परिसर में प्रदर्शन के दौरान लोगों ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाइपलाइन फटने के बाद उसकी मरम्मत में इतना लंबा समय नहीं लगना चाहिए था। यदि समय रहते खराबी को ठीक कर दिया जाता तो ग्रामीणों को एक महीने तक पानी की समस्या नहीं झेलनी पड़ती।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पानी जैसी मूलभूत जरूरत को लेकर उन्हें बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। गांव में कई परिवार पूरी तरह नल-जल योजना पर निर्भर हैं। ऐसे में आपूर्ति बंद होने से उन्हें वैकल्पिक जलस्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि सिर्फ पाइपलाइन की मरम्मत कर पानी चालू करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में पाइपलाइन में खराबी आने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो ग्रामीण सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि करीब 500 परिवारों को जल्द से जल्द नियमित पेयजल उपलब्ध हो सके।
अब ग्रामीणों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। एक महीने से बंद पड़ी नल-जल योजना को कब तक दुरुस्त कर जलापूर्ति बहाल की जाती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन मौजूद होने के बावजूद लोगों की प्यास नहीं बुझ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब घरों के नलों से नियमित रूप से पानी आने लगे।





