बिहार

आंगनबाड़ी केंद्रों में भारी गड़बड़ी का शक, मानदेय कटौती की तैयारी

nidhi
6 Oct 2026 11:16 AM IST
आंगनबाड़ी केंद्रों में भारी गड़बड़ी का शक, मानदेय कटौती की तैयारी
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मुंगेर में 97 में से 40 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र सवालों के घेरे में
मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड और नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। क्षेत्र के कुल 97 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 40 से अधिक केंद्र मानकों के अनुरूप संचालित नहीं पाए गए। कहीं निर्धारित समय में ताला लटका मिला तो कहीं कागज पर 40 बच्चों का नामांकन होने के बावजूद मौके पर गिनती के बच्चे ही मौजूद थे।
पड़ताल सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे के निर्धारित संचालन समय के दौरान आठ प्रमुख आंगनबाड़ी केंद्रों पर की गई। इन आठ केंद्रों में कुल 320 बच्चे नामांकित थे, लेकिन मौके पर केवल 90 बच्चे मिले। यानी औसतन हर केंद्र में 40 नामांकित बच्चों के मुकाबले सिर्फ 11 बच्चे उपस्थित थे। उपस्थिति का प्रतिशत करीब 28.1 फीसदी रहा। सबसे चौंकाने वाली स्थिति मदारपुर गांव के वार्ड-13 स्थित केंद्र संख्या 31/16 में मिली। यहां 40 बच्चों का नामांकन दर्ज था, लेकिन निरीक्षण के समय केवल एक बच्चा मौजूद था। वहीं मकवा वार्ड-4 का केंद्र संख्या 37 दोपहर 12:10 बजे ही बंद पाया गया।
विक्रमपुर सूढ़ी टोला स्थित केंद्र संख्या 85 में 40 बच्चों में से 16, मुस्लिम टोला केंद्र संख्या 45 में 10, रहमतपुर केंद्र संख्या 47 में 12, धुरिया केंद्र संख्या 42 में 16 और पासवान टोली के केंद्र संख्या 36 में 15 बच्चे मिले। कई बच्चे बिना निर्धारित ड्रेस के भी दिखाई दिए। मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। केंद्र संख्या 85, 36 और 90 का प्रभार एक ही सेविका मिक्की कुमारी और सहायिका निशा कुमारी के पास बताया गया। एक सेविका के पास दो से तीन केंद्रों की जिम्मेदारी होने से यह सवाल उठ रहा है कि सभी केंद्रों का नियमित और पारदर्शी संचालन व्यावहारिक रूप से कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसी क्षेत्र में हाल ही में ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण और माताओं को जागरूक करने के लिए ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इसके कुछ ही दिन बाद सामने आई यह जमीनी स्थिति सरकारी योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने कार्रवाई की बात कही है। महिला पर्यवेक्षिका आभा कुमारी सिंह के मुताबिक कमियां मिलने वाले केंद्रों की सेविकाओं से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
सीडीपीओ अमन कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिलने पर संबंधित सेविका का एक माह का मानदेय काटने का प्रावधान है। वहीं बच्चों की उपस्थिति कम मिलने पर एक दिन का मानदेय रोकने की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही एक सेविका के पास एक से ज्यादा केंद्रों का प्रभार होने, उपस्थिति पंजी और पोषाहार वितरण रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कराने की बात भी कही गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कागजों में बच्चों की उपस्थिति, पोषाहार वितरण और नियमित संचालन दर्ज है, तो जमीन पर केंद्र खाली या बंद क्यों मिल रहे हैं। विभागीय जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला सिर्फ लापरवाही का है या रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गड़बड़ी हुई है।
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