बिहार

बिहार में छात्रों-शिक्षकों का आंदोलन तेज

Saba Naaz
21 July 2026 7:22 PM IST
बिहार में छात्रों-शिक्षकों का आंदोलन तेज
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पटना। पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 में राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन के विरोध में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। मंगलवार से शुरू हुए इस आंदोलन के तहत विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले गए, जिससे परिसर में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। विरोध प्रदर्शन में छात्र संगठनों ने भी भाग लिया और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग उठाई।

आंदोलन के पहले दिन पटना विश्वविद्यालय परिसर में एक हजार से अधिक शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और पुराने अधिनियम को बनाए रखने की मांग को लेकर नारेबाजी की। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा अधिनियम में किए गए बदलाव से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होगी और प्रशासनिक अधिकारों पर असर पड़ेगा।

पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ और पटना विश्वविद्यालय कॉलेज कर्मचारी संघ की संयुक्त बैठक धरना स्थल पर ही आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 24 जुलाई तक सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना और प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार संशोधन को वापस नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा। शिक्षकों और कर्मचारियों ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय बिहार के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल है। इसकी स्वायत्तता और गरिमा को बनाए रखना जरूरी है।

प्रदर्शन को अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ के महासचिव प्रो. अरुण कुमार, पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. शिवसागर प्रसाद, महासचिव डॉ. विभाष रंजन, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुबोध कुमार, महासचिव फरमान अब्बास सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के हितों की रक्षा के लिए शिक्षक और कर्मचारी अंतिम समय तक संघर्ष करेंगे।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए छात्र भी शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने पूर्व छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से भी आंदोलन में सहयोग करने की अपील की।

आंदोलन के कारण मंगलवार को विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप रहा। कई विभागों और कॉलेजों में ताले लगे रहे और नियमित कक्षाएं नहीं हो सकीं। इसके अलावा निर्धारित परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ीं। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

बीएन कॉलेज परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे छात्रों ने परीक्षा स्थगित होने की सूचना को लेकर नाराजगी जताई। छात्रों का कहना था कि उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिली, जिससे उन्हें परेशानी हुई। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि परीक्षा स्थगित करने की सूचना पोर्टल और समाचार पत्रों के माध्यम से जारी की गई थी। स्थगित परीक्षा की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत मांग को लेकर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और भविष्य को बचाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक संशोधन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

फिलहाल पटना विश्वविद्यालय में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र 24 जुलाई तक सामूहिक अवकाश और धरना प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े हुए हैं। आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है और आगे भी स्थिति को लेकर निगाहें सरकार और प्रदर्शनकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं।

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