बिहार

बिहार में छात्र आंदोलन उग्र, मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले अभ्यर्थियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल

Ratna Netam
4 Aug 2026 5:04 PM IST
बिहार में छात्र आंदोलन उग्र, मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले अभ्यर्थियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल
x
पटना : बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आयोजित ‘छात्र मार्च’ उस समय उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे और पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन से पानी की बौछार की और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। घटना के दौरान कुछ देर के लिए इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि बाद में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में होने की बात कही।
यह छात्र मार्च भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगों को लेकर आयोजित किया गया था। पटना विश्वविद्यालय से जुड़े एनएसयूआई सहित कई छात्र संगठनों के संयुक्त आह्वान पर हजारों छात्र जेपी गोलंबर पर एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर, तख्तियां और झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
प्रशासन ने पहले से ही मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को देखते हुए जेपी गोलंबर, आयकर गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई थी ताकि प्रदर्शनकारी निर्धारित क्षेत्र से आगे न बढ़ सकें। जैसे ही छात्र बैरिकेडिंग के करीब पहुंचे, उन्होंने उसे हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। हालात बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया।
स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज बौछार के बाद कई प्रदर्शनकारी पीछे हट गए, जबकि कुछ छात्र सड़क पर ही बैठकर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी जारी रखी। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर सड़क किनारे हटाया और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कई छात्रों को हिरासत में लेकर पुलिस वाहनों के जरिए अलग स्थानों पर ले जाया गया।
प्रदर्शन के कारण जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहे तक यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। गांधी मैदान थाना क्षेत्र सहित मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, महिला पुलिस बल और दंगा नियंत्रण इकाइयों को तैनात किया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन और अन्य सुरक्षा उपकरण भी पहले से तैयार रखे गए थे।
छात्र संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उनका कहना था कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने सभी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा सीवान में हालिया छात्र आंदोलन के दौरान घायल छात्र को मुआवजा देने, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई गई।
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को रोजगार एवं शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं सांसद पप्पू यादव ने भी छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही परीक्षा अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है और सरकार को पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी बैरिकेडिंग तोड़ने या प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पूरे घटनाक्रम की निगरानी की जा रही है।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा। फिलहाल पटना में हुए इस प्रदर्शन ने बिहार में रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच इस मुद्दे पर टकराव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Next Story