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भारत नेपाल बॉर्डर पर बढ़ा खतरा
पश्चिम चंपारण: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के तेज कटान ने भारत-नेपाल सीमा की पहचान को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। नदी के लगातार बदलते बहाव और कटाव के कारण सीमा क्षेत्र में लगे पिलरों और जमीन की स्थिति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इस मामले को लेकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक ने सरकार को पत्र लिखकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। गंडक नदी के कटाव का सबसे ज्यादा असर भारत-नेपाल सीमा से सटे सुस्ता क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यहां नदी की धारा में बदलाव के कारण कई जगहों पर सीमा की भौगोलिक स्थिति बदलती नजर आ रही है। इससे सीमा निर्धारण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनौती पैदा हो रही है।
सीमा पिलरों की सुरक्षा को लेकर चिंता
भारत-नेपाल सीमा की पहचान के लिए लगाए गए सीमा स्तंभ (बॉर्डर पिलर) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गंडक के कटान के कारण इन पिलरों के क्षतिग्रस्त होने या बह जाने की आशंका जताई जा रही है। यदि समय रहते संरक्षण कार्य नहीं किए गए तो भविष्य में सीमा की पहचान को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।
SSB सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है और ऐसे संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखती है। नदी कटान से पैदा हो रही समस्या को देखते हुए बल की ओर से सरकार को स्थिति से अवगत कराया गया है।
नदी का बदलता रुख बढ़ा रहा परेशानी
गंडक नदी हर साल बरसात के दौरान अपना रुख बदलती है। तेज बहाव के कारण नदी किनारे की जमीन का बड़ा हिस्सा कटाव की चपेट में आ जाता है। सीमावर्ती गांवों के लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार कटाव के कारण कई इलाकों का स्वरूप बदल चुका है। नदी के बहाव में बदलाव से खेती की जमीन और आवासीय क्षेत्रों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
सरकार से स्थायी समाधान की मांग
सीमा क्षेत्र की सुरक्षा और भौगोलिक स्थिति को बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ लंबे समय से नदी कटान रोकने के लिए स्थायी उपायों की मांग कर रहे हैं। इसमें तटबंध मजबूत करना, कटाव रोधी कार्य और सीमा पिलरों की सुरक्षा जैसे कदम शामिल हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती है कि प्राकृतिक बदलावों के बीच सीमा की स्पष्ट पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखा जाए।
सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र
भारत-नेपाल सीमा खुली और संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में सीमा की भौतिक पहचान में किसी भी तरह का बदलाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। SSB लगातार इस क्षेत्र में गश्त और निगरानी करती है। अब सरकार के स्तर पर यह तय किया जाना है कि गंडक कटान से प्रभावित क्षेत्र में किस तरह के स्थायी कदम उठाए जाएं, ताकि सीमा की पहचान और सुरक्षा दोनों को मजबूत रखा जा सके।
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