बिहार
SSB की बड़ी कार्रवाई, भारत-नेपाल सीमा पर 510 किलो गांजा बरामद
Rajeshwari Nishad
15 Oct 2026 3:08 PM IST

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सुपौल। बिहार के सुपौल जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने बड़ी कार्रवाई की है। वीरपुर स्थित 45वीं वाहिनी के जवानों ने सीमा चौकी फतेहपुर क्षेत्र में एक आम के बगीचे से 510 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। तस्करों ने मादक पदार्थ की इस बड़ी खेप को भारतीय सीमा के अंदर छिपाकर रखा था। एसएसबी को संदिग्ध सामान रखे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद जवानों ने संबंधित इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आम के बगीचे में छिपाकर रखे गए गांजे के 13 बंडल बरामद हुए। हालांकि, तलाशी अभियान के दौरान मौके से कोई संदिग्ध व्यक्ति नहीं मिला। बरामद गांजे को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वीरपुर थाना पुलिस को सौंप दिया गया है।
गुप्त सूचना पर एसएसबी ने की कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात एसएसबी की 45वीं वाहिनी को सूचना मिली थी कि फतेहपुर गांव के आसपास एक बगीचे में संदिग्ध सामान छिपाकर रखा गया है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसएसबी अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करने का निर्णय लिया। इसके बाद सीमा चौकी फतेहपुर से जवानों को बताए गए स्थान पर भेजा गया।जवानों ने मौके पर पहुंचकर आम के बगीचे और उसके आसपास के हिस्सों की तलाशी शुरू की। इसी दौरान उन्हें छिपाकर रखे गए कई बंडल मिले।जांच करने पर बंडलों में गांजा होने की जानकारी सामने आई। बरामद मादक पदार्थ का कुल वजन लगभग 510 किलोग्राम पाया गया।
सीमा स्तंभ संख्या 204 से 700 मीटर अंदर छिपाया था गांजा
एसएसबी के अनुसार, जिस स्थान से गांजा बरामद किया गया, वह भारत-नेपाल सीमा के स्तंभ संख्या 204 से लगभग 700 मीटर भारतीय क्षेत्र के अंदर स्थित है।यह स्थान फतेहपुर गांव के पास एक आम का बगीचा है। इसी बगीचे में मादक पदार्थ की बड़ी खेप छिपाकर रखी गई थी।बरामदगी के बाद जवानों ने आसपास के क्षेत्र में भी तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, किसी संदिग्ध व्यक्ति का पता नहीं चल सका।इतनी बड़ी मात्रा में गांजा मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इसे किसने छिपाया था और इसे कहां पहुंचाने की योजना थी।इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
आम के बगीचे से मिले गांजे के 13 बंडल
तलाशी अभियान के दौरान एसएसबी जवानों को गांजे के कुल 13 बंडल मिले।
इन बंडलों में रखे मादक पदार्थ का कुल वजन करीब 510 किलोग्राम था। इतनी बड़ी खेप की बरामदगी को सीमावर्ती इलाके में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
हालांकि, बरामद गांजे की बाजार कीमत के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि मादक पदार्थ को नेपाल से भारत लाया गया था या किसी अन्य स्थान से यहां पहुंचाया गया था।फिलहाल जांच के बिना गांजे के स्रोत और उसके संभावित गंतव्य के बारे में कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
तलाशी के दौरान नहीं मिला कोई तस्कर
एसएसबी ने जिस स्थान से गांजा बरामद किया, वहां तलाशी के दौरान कोई संदिग्ध व्यक्ति मौजूद नहीं मिला।जवानों ने आसपास के इलाके की भी जांच की, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
इस वजह से फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि इतनी बड़ी खेप को आम के बगीचे में किसने छिपाया था।यह भी जांच का विषय है कि मादक पदार्थ को वहां अस्थायी रूप से रखा गया था या उसे आगे किसी दूसरे स्थान पर पहुंचाया जाना था।इस बरामदगी के बाद संबंधित लोगों की पहचान और गांजे की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।
वीरपुर थाना पुलिस को सौंपा गया गांजा
एसएसबी ने गांजे की बरामदगी के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।इसके बाद जब्त मादक पदार्थ को आगे की कार्रवाई के लिए वीरपुर थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया।अब पुलिस के स्तर पर मामले की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।मादक पदार्थ की इतनी बड़ी मात्रा मिलने के कारण इस मामले में गांजे के स्रोत, परिवहन और संभावित तस्करी नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, अभी किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।सहायक उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह समेत चार जवान रहे शामिलएसएसबी की इस कार्रवाई में 45वीं वाहिनी के सहायक उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह सहित कुल चार जवान शामिल थे।
टीम ने सूचना मिलने के बाद बताए गए स्थान पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया और गांजे के बंडल बरामद किए।इस कार्रवाई के जरिए सुरक्षाबलों ने मादक पदार्थ की एक बड़ी खेप को आगे पहुंचने से रोक दिया।सीमा क्षेत्र में तस्करी रोकने के लिए खुफिया सूचनाओं के आधार पर इस तरह की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कार्यवाहक कमांडेंट ने दी कार्रवाई की जानकारी
एसएसबी की 45वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट जगदीश शर्मा ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जवान सतर्कता बरत रहे हैं।सीमा क्षेत्र में निगरानी और जांच अभियान आगे भी जारी रखे जाएंगे।
सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकना बड़ी चुनौती
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां होती रहती हैं।हालांकि, इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर कुछ आपराधिक तत्व अवैध वस्तुओं की तस्करी करने का प्रयास करते हैं।
मादक पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकना सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।सुपौल जिले के वीरपुर सहित सीमावर्ती इलाकों में एसएसबी की ओर से नियमित निगरानी और जांच की जाती है।इससे पहले भी क्षेत्र में मादक पदार्थों की बरामदगी के मामले सामने आ चुके हैं।
गांजा तस्करी के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान
भारत में गांजे की अवैध खरीद-बिक्री, परिवहन और कब्जे से संबंधित अपराधों पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट यानी एनडीपीएस कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
गांजे के मामलों में 20 किलोग्राम या उससे अधिक मात्रा को वाणिज्यिक मात्रा माना जाता है।ऐसे में 510 किलोग्राम गांजे की बरामदगी बेहद गंभीर मामला है।हालांकि, किसी व्यक्ति पर कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच और पर्याप्त साक्ष्यों की आवश्यकता होगी।
अब तस्करों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती
भारत-नेपाल सीमा के फतेहपुर क्षेत्र में हुई इस बड़ी बरामदगी के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल गांजा छिपाने वाले लोगों की पहचान का है।आम के बगीचे में इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ कैसे पहुंचा और इसे आगे कहां ले जाने की तैयारी थी, इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक होगी।फिलहाल एसएसबी ने 510 किलोग्राम गांजा बरामद कर पुलिस को सौंप दिया है।
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