बिहार

जैन मंदिरों में सजेंगे विशेष दरबार, होंगे अभिषेक और शांतिधारा के भव्य आयोजन

Saba Naaz
27 Jun 2026 3:32 PM IST
जैन मंदिरों में सजेंगे विशेष दरबार, होंगे अभिषेक और शांतिधारा के भव्य आयोजन
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पटना: चातुर्मास के पावन योग के बीच जुलाई २०२६ का महीना जैन समाज के लिए बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस पूरे महीने जैन समाज द्वारा सात प्रमुख तीर्थंकरों के पावन कल्याणक पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाए जाएंगे। इन विशेष अवसरों पर पटना समेत देश भर के तमाम जैन मंदिरों में भव्य धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दौरान जिनालयों में प्रतिदिन विशेष पूजन, देव-शास्त्र-गुरु पूजा, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, स्वाध्याय, संगीतमय आरती और जैन संतों के तत्वचर्चा व प्रवचन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के चरणों में अर्घ्य समर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।

माह की शुरुआत भगवान आदिनाथ के गर्भ कल्याणक से

धार्मिक कैलेंडर के अनुसार, जुलाई महीने के पहले ही सप्ताह में कई महत्वपूर्ण तिथियां आ रही हैं। इस धार्मिक माह का शुभारंभ २ जुलाई २०२६ को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के पावन गर्भ कल्याणक महामहोत्सव से होगा। इसके ठीक बाद, ६ जुलाई को १२वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का गर्भ कल्याणक मनाया जाएगा, जिसके तहत मंदिरों में विशेष शांतिधारा और अष्टद्रव्य से पूजा की जाएगी। इसी कड़ी में ८ जुलाई को १३वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व मनाया जाएगा, जहां श्रद्धालु निर्वाण लाडू चढ़ाकर प्रभु के मोक्ष मार्ग का स्मरण करेंगे। अगले ही दिन, ९ जुलाई को २१वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक एक साथ बेहद श्रद्धापूर्वक आयोजित किया जाएगा।

उत्तरार्ध में मनेगा महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक

जुलाई महीने के उत्तरार्ध (आधे महीने के बाद) में भी जैन समाज भक्ति के सागर में गोते लगाएगा। १९ जुलाई २०२६ को जैन धर्म के २४वें और अंतिम तीर्थंकर, वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी का पावन गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन जैन थियेटरों और माता त्रिशला के १६ स्वप्नों के मंचन जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अगले दिन, २० जुलाई को २२वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। वहीं, महीने के अंतिम दिन यानी ३१ जुलाई को २०वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ के गर्भ कल्याणक के साथ जुलाई माह के कल्याणक पर्वों की श्रृंखला संपन्न होगी।

धर्माराधना और आत्म-साधना की अपील

जैन समाज के प्रबुद्ध जनों और मंदिर कमेटियों ने सभी श्रावक-श्राविकाओं से अपील की है कि वे चातुर्मास के इस पावन समय में सांसारिक व्यस्तताओं से समय निकालकर इन सातों कल्याणक महोत्सवों में सपरिवार सम्मिलित हों। इन पावन अवसरों पर व्रत, उपवास, सामायिक और जप-तप के जरिए आत्म-कल्याण और विश्व शांति की भावना भाई जाएगी, जिससे पूरे महीने जैन मंदिरों का माहौल पूरी तरह मंगलमय और भक्तिमय बना रहेगा।

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