बिहार

गंडक की बाढ़ से बिहार में बिगड़े हालात, 14 जगह तटबंध टूटे, राहत-बचाव में 41 टीमें तैनात

Kavita2
2 Oct 2026 9:42 AM IST
गंडक की बाढ़ से बिहार में बिगड़े हालात, 14 जगह तटबंध टूटे, राहत-बचाव में 41 टीमें तैनात
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पटना। गंगा और कोसी की बाढ़ से जूझ रहे बिहार पर अब गंडक नदी का कहर टूट पड़ा है। गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी और तेज बहाव के कारण पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिलों के बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पिछले चार दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर 14 जगह तटबंध या बांध टूटने से स्थिति और गंभीर हो गई है। कई गांवों में पानी तेजी से घुसा है और लोगों के सामने सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है।

गंडक नदी में बढ़े पानी का असर सबसे अधिक नदी किनारे और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई गांव चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़कों और संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ने से आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर लोगों को नावों के सहारे बाहर निकाला जा रहा है। बाढ़ के कारण खेतों और घरों में पानी भरने की स्थिति भी पैदा हो गई है।

पूर्वी और पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में गंडक का पानी तेजी से फैल रहा है। तटबंध टूटने के बाद नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। कई परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी तेज कर दी गई है।

गोपालगंज जिले में भी बाढ़ का असर गंभीर बताया जा रहा है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांवों में पानी पहुंच चुका है। तटबंध और बांध टूटने की घटनाओं ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी का दबाव इसी तरह बना रहा तो और क्षेत्रों में भी बाढ़ फैल सकती है।

सारण और वैशाली जिले के नदी किनारे बसे इलाकों में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बाढ़ का पानी खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर फैलने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कई जगह लोगों को अपने पशुओं और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ रहा है। नदी के तेज बहाव के कारण स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

पटना जिले के दियारा इलाके में भी समस्या बढ़ गई है। गंगा और अन्य नदियों के जलस्तर के कारण पहले से प्रभावित दियारा क्षेत्रों में अब स्थिति और मुश्किल होती दिखाई दे रही है। नदी किनारे बसे परिवारों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ का पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।

पिछले चार दिनों में 14 स्थानों पर तटबंध या बांध टूटने की घटनाओं ने बाढ़ की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से गांवों में प्रवेश करता है, जिससे राहत और बचाव कार्य के लिए कम समय मिलता है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि संवेदनशील इलाकों में पहले से टीमें तैनात रहें और जरूरत पड़ने पर तत्काल लोगों को बाहर निकाला जा सके।

बाढ़ की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों में आपदा राहत बल की कुल 41 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की 14 और राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की 27 टीमें शामिल हैं। इन टीमों को अलग-अलग जिलों में राहत और बचाव कार्य के लिए लगाया गया है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नावों और अन्य बचाव उपकरणों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक पहुंच रही हैं। प्राथमिकता उन गांवों को दी जा रही है, जहां पानी तेजी से बढ़ा है या जहां संपर्क मार्ग टूट गए हैं। बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और बीमार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राहत शिविरों और अस्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्था भी की जा रही है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पीने का पानी और जरूरी दवाओं की व्यवस्था करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। जिन क्षेत्रों का सड़क संपर्क टूट गया है, वहां नावों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ने की आशंका है। बड़ी संख्या में खेत पानी में डूब गए हैं और फसलों को नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के चारे की समस्या भी सामने आ सकती है। पानी लंबे समय तक जमा रहने की स्थिति में बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहना होगा।

अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता तटबंधों की निगरानी और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना है। जहां तटबंध कमजोर हैं, वहां मरम्मत और मजबूती के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बिहार में पहले गंगा और कोसी की बाढ़ ने कई इलाकों को प्रभावित किया था। अब गंडक नदी में आई बाढ़ ने संकट को और व्यापक बना दिया है। एक साथ कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनने से राहत और बचाव संसाधनों पर भी दबाव बढ़ गया है।

फिलहाल पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली समेत प्रभावित जिलों में प्रशासन अलर्ट पर है। 41 राहत टीमें मैदान में उतारी गई हैं और जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त संसाधन भी लगाए जा सकते हैं। आने वाले समय में नदी के जलस्तर में बदलाव के आधार पर स्थिति की गंभीरता तय होगी।

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