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साइबर ठगी
बांका: साइबर अपराधियों को फर्जी तरीके से हासिल किए गए सिम कार्ड उपलब्ध कराने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि युवक गांव के लोगों को KYC कराने का झांसा देकर उनके दस्तावेज और बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल करता था और उनके नाम से सिम कार्ड जारी करवाकर झारखंड में सक्रिय साइबर ठगी गिरोह तक पहुंचाता था। मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने में जुटी है।
जानकारी के अनुसार आरोपी साइबर ठगी करने वालों के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहा था। वह ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें मोबाइल सिम या KYC अपडेट कराने की बात कहता था। इस प्रक्रिया के दौरान लोगों से पहचान से संबंधित दस्तावेज और आवश्यक जानकारी हासिल की जाती थी। आरोप है कि इसी का दुरुपयोग कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय कराए जाते थे।
झारखंड भेजे जाते थे सिम कार्ड
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक कथित रूप से हासिल किए गए सिम कार्ड झारखंड भेजे जाते थे। आशंका है कि इन सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी के लिए फोन कॉल, मैसेज और अन्य डिजिटल गतिविधियों में किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने सिम उपलब्ध कराए और वे किन लोगों तक पहुंचे। साइबर अपराध में दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी सिम का इस्तेमाल जांच एजेंसियों से पहचान छिपाने के लिए किया जा सकता है। ठगी की शिकायत होने पर मोबाइल नंबर जिस व्यक्ति के दस्तावेज पर जारी होता है, शुरुआती जांच उसकी तरफ पहुंच सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में वास्तविक इस्तेमालकर्ता तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन, संपर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी की पड़ताल की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वह झारखंड में किन लोगों के संपर्क में था और सिम कार्ड के बदले उसे कितनी रकम मिलती थी। मामले में अन्य एजेंटों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। अगर बड़े स्तर पर सिम कार्ड जारी किए जाने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित विक्रेताओं या अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा सकती है।
KYC कराते समय रहें सावधान
यह मामला एक बार फिर KYC और व्यक्तिगत दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सतर्क करता है। आधार, पैन या अन्य पहचान संबंधी जानकारी केवल अधिकृत माध्यमों पर ही साझा करनी चाहिए। बायोमेट्रिक प्रक्रिया के दौरान भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका इस्तेमाल उसी काम के लिए हो रहा है जिसके लिए सहमति दी गई है।
अगर किसी व्यक्ति को संदेह है कि उसके नाम पर अनजान मोबाइल नंबर जारी किया गया है तो दूरसंचार विभाग की आधिकारिक सेवाओं के जरिए अपने नाम से जुड़े मोबाइल कनेक्शन की जानकारी जांची जा सकती है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के आधार पर साइबर ठगी गिरोह की पूरी चेन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
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