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पटना। बिहार की राजनीति में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि आखिर वोट कहां चोरी हुए हैं? श्याम रजक ने चुनाव में हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने की विपक्षी दलों की प्रवृत्ति की आलोचना की। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में चुनावी पारदर्शिता और विपक्ष के आरोपों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।श्याम रजक ने विपक्षी नेताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि जब किसी चुनाव में विपक्षी दलों को जीत मिलती है, तब ईवीएम और मतदान प्रक्रिया को लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते? उन्होंने विपक्ष के राजनीतिक रवैये पर सवाल उठाते हुए चुनाव परिणामों को स्वीकार करने और जनता के फैसले का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इससे पहले भी श्याम रजक चुनावी हार के बाद ईवीएम को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों की आलोचना कर चुके हैं।
ईवीएम को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना
बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं तथा ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, एनडीए के नेता इन आरोपों को चुनावी हार के बाद उठाया जाने वाला राजनीतिक मुद्दा बता रहे हैं।श्याम रजक की टिप्पणी भी इसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा मानी जा रही है। उनका सवाल है कि यदि विपक्ष के पास मतदान में गड़बड़ी से संबंधित ठोस जानकारी है, तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए।हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूचियों की शुद्धता, मतदान की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है।
वोट चोरी के आरोपों पर गरमाई राजनीति
देशभर में कथित वोट चोरी का मुद्दा पिछले कुछ समय से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के कई दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन ने इसी मुद्दे पर रैली आयोजित की थी। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में अनियमितताओं से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।इस बीच जदयू और भाजपा के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। एनडीए नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों को केवल राजनीतिक सुविधा के आधार पर स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
जीतने पर ईवीएम सही, हारने पर सवाल क्यों?
श्याम रजक की टिप्पणी का प्रमुख आधार विपक्षी दलों के चुनावी रुख में कथित विरोधाभास है। सत्तापक्ष के नेताओं का तर्क है कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तब मतदान प्रणाली पर उसका भरोसा बना रहता है, लेकिन चुनाव हारने के बाद उसी व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने लगते हैं।हालांकि, विपक्षी दल इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि चुनाव जीतने या हारने से अलग मतदान प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना जरूरी है।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी सभी सीटें जीतने की स्थिति में भी मतपत्र से मतदान कराने की अपनी मांग जारी रखेगी।इससे स्पष्ट है कि ईवीएम पर राजनीतिक मतभेद केवल चुनावी परिणामों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मतदान की पद्धति और उसकी निगरानी को लेकर भी अलग-अलग दलों की राय भिन्न है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच और मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है।अक्टूबर में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया था। विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने उनसे संबंधित प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा है। गठबंधन ने चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात कही थी।हालांकि, किसी राजनीतिक दल की ओर से आरोप लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित आरोप प्रमाणित हो गए हैं। चुनावी अनियमितताओं के दावों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड, जांच और सक्षम संस्थाओं के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होते हैं।
बिहार में बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
बिहार की राजनीति में जदयू और विपक्षी दलों के बीच चुनावी मुद्दों को लेकर लगातार बयानबाजी हो रही है। श्याम रजक के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है।एनडीए के नेता विपक्ष पर जनता के जनादेश को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाते हैं, जबकि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सवाल उठाने को अपना लोकतांत्रिक अधिकार बताता है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनावी प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए।
लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव सबसे महत्वपूर्ण
भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव की निष्पक्षता और मतदाताओं का विश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईवीएम, वीवीपैट और मतदाता सूचियों को लेकर किसी भी विवाद का असर राजनीतिक वातावरण पर पड़ सकता है।ऐसे में चुनावी व्यवस्था से संबंधित आरोपों की तथ्यपरक जांच और मतदाताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
श्याम रजक के सवाल ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के सामने चुनाव
वोट कहां चोरी हुए?' JDU नेता श्याम रजक का विपक्ष पर तीखा हमला, EVM के आरोपों पर उठाए सवालपटना। देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों से पूछा कि आखिर वोट कहां चोरी हुए हैं? श्याम रजक ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव परिणामों को लेकर अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग रुख अपनाना उचित नहीं है। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।दरअसल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों और चुनावी व्यवस्थाओं में कथित खामियों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताता रहा है।
विपक्ष के आरोपों पर श्याम रजक का पलटवार
जदयू नेता श्याम रजक ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, तब उन्हें ईवीएम और चुनावी व्यवस्था में कोई समस्या दिखाई नहीं देती, लेकिन हारने के बाद वोट चोरी और मशीनों की विश्वसनीयता का मुद्दा उठाया जाने लगता है।इससे पहले भी श्याम रजक ने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए चुनाव परिणामों के प्रति विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जहां विपक्ष को जीत मिलती है, वहां ईवीएम और वोट चोरी का मुद्दा नहीं उठाया जाता।उनकी टिप्पणी को विपक्ष की चुनावी रणनीति पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। जदयू का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणाम जनता के फैसले का प्रतिनिधित्व करते हैं और राजनीतिक दलों को मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।हालांकि, विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को केवल हार-जीत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
ईवीएम को लेकर लगातार सवाल उठा रहा विपक्ष
देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।हाल के दिनों में विपक्षी गठबंधन इंडिया ने भी कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और मतदाता सूची से किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।इसके साथ ही कई विपक्षी नेताओं ने ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग दोहराई है।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव जीतने की स्थिति में भी मतपत्र से मतदान कराने की मांग जारी रखेगी। उनका तर्क है कि चुनावी व्यवस्था को लेकर उठ रही आशंकाओं का समाधान आवश्यक है।
राष्ट्रपति तक पहुंच चुका है वोट चोरी का मामला
कथित वोट चोरी का विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है। अक्टूबर में विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों और चिंताओं को सामने रखा था।विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने उनकी बात सुनी और आरोपों से संबंधित प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा। विपक्ष ने चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप का आग्रह किया था।इस दौरान विपक्ष ने ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग भी उठाई थी।विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना निर्वाचन आयोग और सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।हालांकि, कथित वोट चोरी के आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी विशिष्ट चुनाव में अनियमितता हुई या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित साक्ष्यों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
दिल्ली की रैली के बाद और तेज हुआ विवाद
एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन ने कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी रैली आयोजित की थी।इस रैली में विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में सुधार तथा मताधिकार की रक्षा के लिए राजनीतिक संघर्ष जारी रखने की बात कही।रैली के दौरान विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं।इसी राजनीतिक माहौल में जदयू नेता श्याम रजक की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयान से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच चुनावी व्यवस्था को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
चुनाव में पारदर्शिता और जनता के भरोसे का सवाल
भारत में ईवीएम के साथ वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य मतदान के दौरान मतदाता को अपने वोट की पुष्टि करने की सुविधा देना है।अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में सभी वीवीपैट पर्चियों की अनिवार्य गिनती तथा मतपत्र प्रणाली की वापसी संबंधी मांगों को स्वीकार नहीं किया था। हालांकि, अदालत ने चुनाव के बाद कुछ अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रियाओं के निर्देश दिए थे।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी व्यवस्था को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हैं। लेकिन किसी भी आरोप की विश्वसनीयता उसके समर्थन में उपलब्ध प्रमाणों पर निर्भर करती है।
बिहार की राजनीति में बयान के मायने
श्याम रजक बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। जदयू के वरिष्ठ नेता के रूप में उनका विपक्ष पर हमला राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।बिहार में जदयू और राष्ट्रीय जनता दल के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है। ऐसे में वोट चोरी और ईवीएम के मुद्दे पर दोनों पक्षों की अलग-अलग राय राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकती है।फिलहाल श्याम रजक के सवाल ने विपक्ष के सामने एक बार फिर अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने की चुनौती रखी है। दूसरी ओर विपक्ष चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाता रहा है।आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईवीएम और कथित वोट चोरी पर जारी विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या चुनावी सुधारों को लेकर कोई व्यापक पहल सामने आती है।
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