बिहार

भाजपा विधायक राजू सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, दोषसिद्धि पर रोक की मांग खारिज

Kavita2
30 Sept 2026 9:40 AM IST
भाजपा विधायक राजू सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, दोषसिद्धि पर रोक की मांग खारिज
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पटना। बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर कानूनी और राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि उनकी मूल अपील पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।

मामला वर्ष 2018 में दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में आयोजित नववर्ष पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग से जुड़ा है। इस घटना में आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता को गोली लगी थी और बाद में उनकी मौत हो गई थी। मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराते हुए चार साल कारावास की सजा सुनाई थी। उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राजू सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उनकी अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था और कारावास की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें अपील लंबित रहने तक जेल से बाहर रहने की राहत दी थी। इसके बाद विधायक की ओर से दोषसिद्धि पर भी रोक लगाने की मांग की गई थी, क्योंकि दोषसिद्धि का असर उनकी विधानसभा सदस्यता पर पड़ सकता है।

मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने वाली अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य अपील पर आगे सुनवाई होती रहेगी और मौजूदा आदेश में की गई टिप्पणियों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा।

इस मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस का पक्ष भी मांगा है और मृतक महिला के परिवार को भी अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही है। इससे साफ है कि अपील की प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और हाईकोर्ट आगे मामले के गुण-दोष पर सुनवाई करेगा।

राजू कुमार सिंह मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। चार साल की सजा मिलने के बाद से ही उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब दोषसिद्धि पर रोक नहीं मिलने से यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दल भी इस मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।

हर्ष फायरिंग की यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की दरम्यानी रात की बताई गई है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नववर्ष की पार्टी आयोजित की गई थी। इसी दौरान गोली चलने से अर्चना गुप्ता घायल हुई थीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद राजू सिंह के खिलाफ मुकदमा चला और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो और शस्त्र अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले के खिलाफ राजू सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्हें सजा निलंबित होने के कारण फिलहाल जेल से बाहर रहने की राहत मिली हुई है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण उनकी कानूनी स्थिति पहले जैसी नहीं हुई है।

दोषसिद्धि और सजा के बीच कानूनी रूप से अंतर होता है। हाईकोर्ट ने पहले उनकी सजा को निलंबित किया था, लेकिन अब दोषसिद्धि पर रोक लगाने की अलग मांग को स्वीकार नहीं किया गया। यही बिंदु उनकी सदस्यता से जुड़े सवालों को महत्वपूर्ण बनाता है।

मामले की सुनवाई के दौरान विधायक की ओर से अदालत से आग्रह किया गया था कि उनकी दोषसिद्धि को निलंबित किया जाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि दोषसिद्धि के कारण उन्हें गंभीर राजनीतिक और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर यह राहत देना उचित नहीं समझा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि मामले से जुड़े तथ्य और विधायक के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए दोषसिद्धि पर रोक के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता। साथ ही कोर्ट ने यह साफ किया कि उसकी मौजूदा टिप्पणियां केवल इस अंतरिम अर्जी तक सीमित हैं और अपील पर अंतिम निर्णय अलग से होगा।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि राजू सिंह की मूल अपील पर हाईकोर्ट आगे क्या फैसला देता है। फिलहाल दोषसिद्धि पर रोक नहीं मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं विधानसभा सदस्यता को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

इस मामले ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों को आपराधिक मामलों में मिली सजा और उसके बाद होने वाले संवैधानिक परिणामों को चर्चा में ला दिया है। आगे का फैसला हाईकोर्ट में लंबित अपील और उससे जुड़े कानूनी आदेशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दोषसिद्धि पर तत्काल राहत नहीं मिली है और उनका मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन बना हुआ है।

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