
हाजीपुर। शराब तस्करी के लिए अपनाए गए एक नए तरीके का खुलासा करते हुए उत्पाद विभाग की टीम ने गंगा पुल चेकपोस्ट पर बड़ी कार्रवाई की है। रविवार रात जांच के दौरान एक ट्रक से सड़े-गले सेबों की आड़ में छिपाकर ले जाई जा रही चंडीगढ़ निर्मित ब्रांडेड शराब की बड़ी खेप बरामद की गई। जब्त शराब की कीमत करीब 64 लाख रुपये बताई जा रही है। ट्रक से कुल 597 कार्टन में 5301 लीटर शराब मिली है। मामले में चालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शराब की खेप हिमाचल प्रदेश से लाई जा रही थी और इसे पूर्णिया में पहुंचाया जाना था। तस्करों ने जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए शराब के कार्टन को ट्रक में लदे सड़े-गले सेबों के बीच छिपा रखा था। लेकिन गंगा पुल चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की जांच में पूरा मामला सामने आ गया।
चेकपोस्ट पर शक हुआ तो खुलवाया ट्रक
रविवार रात गंगा पुल चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की टीम वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान वहां पहुंचे ट्रक को जांच के लिए रोका गया। ऊपर से देखने पर वाहन में सेब लदे होने का आभास हो रहा था। लेकिन जांच टीम को संदेह होने पर ट्रक की गहन तलाशी ली गई।
जैसे-जैसे सेबों के बीच रखी सामग्री हटाई गई, अंदर शराब के कार्टन दिखाई देने लगे। इसके बाद टीम ने पूरे वाहन की तलाशी शुरू कर दी। जांच पूरी होने पर ट्रक के भीतर से बड़ी संख्या में शराब के कार्टन बरामद हुए।
बताया गया कि सेब भी अच्छी स्थिति में नहीं थे। सड़े-गले सेबों की आड़ बनाकर शराब को इस तरह छिपाया गया था कि सामान्य जांच में खेप पकड़ में न आए।
597 कार्टन में मिली 5301 लीटर शराब
उत्पाद विभाग की ओर से की गई गिनती में ट्रक से कुल 597 कार्टन शराब बरामद हुई। इन कार्टनों में कुल 5301 लीटर शराब होने की जानकारी दी गई है। बरामद शराब अलग-अलग ब्रांड की बताई जा रही है और इसका निर्माण चंडीगढ़ में हुआ था।
जब्त की गई शराब का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 64 लाख रुपये बताया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी के बाद अधिकारियों ने ट्रक को भी जब्त कर लिया।
अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि खेप किसने भेजी थी और इसे पूर्णिया में किस व्यक्ति या नेटवर्क को सौंपा जाना था।
हिमाचल प्रदेश से पूर्णिया पहुंचनी थी खेप
प्रारंभिक पूछताछ और जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार शराब की यह खेप हिमाचल प्रदेश से चली थी। इसे लंबी दूरी तय करके पूर्णिया तक पहुंचाया जाना था। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने अब पूरे परिवहन मार्ग का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा।
शराब चंडीगढ़ निर्मित बताई गई है, जबकि ट्रक हिमाचल प्रदेश से खेप लेकर चला था। इस कारण शराब की खरीद, भंडारण और परिवहन से जुड़ी कड़ियों की जांच की जा सकती है।
अधिकारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पूर्णिया में इस खेप को कौन लेने वाला था। यदि प्राप्तकर्ता की पहचान होती है तो तस्करी के बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
चालक समेत दो गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान उत्पाद विभाग ने ट्रक चालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों से शराब की खेप के स्रोत और गंतव्य के बारे में पूछताछ की जा रही है।
जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि गिरफ्तार लोगों की भूमिका केवल शराब पहुंचाने तक सीमित थी या वे तस्करी नेटवर्क से सीधे जुड़े हुए थे। उनके मोबाइल फोन, संपर्क और यात्रा से जुड़ी जानकारी पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके साथ ही ट्रक के मालिक और वाहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच भी अहम होगी।
सेब की खेप को बनाया तस्करी का कवर
इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान शराब छिपाने के तरीके ने खींचा है। तस्करों ने फल ले जाने वाले वाहन का इस्तेमाल कर शराब की बड़ी खेप को छिपाने की कोशिश की। शराब के कार्टन को सड़े-गले सेबों के बीच रखा गया था।
ऐसा माना जा रहा है कि फल से लदा ट्रक दिखाकर विभिन्न जांच चौकियों से आसानी से निकलने की योजना रही होगी। लेकिन गंगा पुल चेकपोस्ट पर हुई गहन जांच ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया।
इससे पहले भी प्रतिबंधित या अवैध सामान के परिवहन के लिए सब्जियों, फलों और अन्य सामान की आड़ लेने के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए मालवाहक वाहनों की जांच में अतिरिक्त सतर्कता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शराबबंदी के कारण तस्करी पर कड़ी नजर
बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण दूसरे राज्यों से अवैध शराब लाने वाले नेटवर्क पर उत्पाद विभाग और अन्य एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं। राज्य की सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर चेकपोस्ट के माध्यम से संदिग्ध वाहनों की जांच की जाती है।
शराब तस्कर जांच से बचने के लिए लगातार नए तरीके अपनाते हैं। कभी सामान्य माल के नीचे शराब छिपाई जाती है तो कभी वाहन में विशेष जगह तैयार कर खेप पहुंचाने की कोशिश की जाती है। मौजूदा मामले में सड़े-गले सेबों को शराब छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
नेटवर्क की तलाश में आगे बढ़ सकती है जांच
64 लाख रुपये मूल्य की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद मामले की जांच केवल गिरफ्तार दोनों लोगों तक सीमित रहने की संभावना कम है। शराब किसने खरीदी, ट्रक में कहां लोड की गई, भुगतान किस माध्यम से हुआ और पूर्णिया में किसे डिलीवरी देनी थी—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
ट्रक के रास्ते में पड़ने वाले स्थानों और गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल से भी अहम जानकारी सामने आ सकती है। यदि यह खेप किसी संगठित नेटवर्क से जुड़ी मिली तो आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
फिलहाल गंगा पुल चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की सतर्कता से शराब की एक बड़ी खेप अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही पकड़ ली गई। 597 कार्टन में भरी 5301 लीटर शराब, करीब 64 लाख रुपये की अनुमानित कीमत और उसे छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए सड़े-गले सेबों ने इस कार्रवाई को खास बना दिया है। अब जांच का फोकस इस खेप के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की पहचान पर रहेगा।





