बिहार

पीरपैंती में स्वच्छता योजना जमीन के अभाव में अटकी, एफएसटीपी निर्माण चार महीने से बंद

Kavita2
30 Aug 2026 1:03 PM IST
पीरपैंती में स्वच्छता योजना जमीन के अभाव में अटकी, एफएसटीपी निर्माण चार महीने से बंद
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पीरपैंती। शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना अब जमीन के विवाद में फंसती नजर आ रही है। पीरपैंती नगर पंचायत में प्रस्तावित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का निर्माण पिछले करीब चार महीने से जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण रुका हुआ है।

सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि प्लांट के निर्माण के लिए केवल करीब डेढ़ एकड़ जमीन की आवश्यकता है, लेकिन जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर पहले ही बड़ी मात्रा में भूमि चिह्नित की गई थी। अंचल कार्यालय की ओर से करीब एक वर्ष पहले बुडको (BUIDCO) को 13 एकड़ जमीन का खाता-खसरा विवरण और एनओसी भी उपलब्ध करा दिया गया था।

इसके बावजूद जब निर्माण एजेंसी काम शुरू कराने के लिए मौके पर पहुंची तो वहां अधिकांश जमीन पर पहले से कब्जा मिला। इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।

जमीन मिलने के बाद भी नहीं शुरू हो पाया काम

जानकारी के अनुसार, पीरपैंती नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एफएसटीपी का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। इस प्लांट के जरिए सेप्टिक टैंक और अन्य स्रोतों से निकलने वाले मल-कीचड़ (फीकल स्लज) का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाना है।

योजना का उद्देश्य शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना और खुले में गंदगी फैलने की समस्या को रोकना है। लेकिन जमीन की समस्या के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

बुडको को दी गई थी जमीन की जानकारी

बताया जा रहा है कि पीरपैंती अंचल कार्यालय ने करीब एक साल पहले बुडको को एफएसटीपी निर्माण के लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे।

अंचल प्रशासन की ओर से खाता-खसरा और एनओसी जारी होने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी ने स्थल निरीक्षण किया, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति अलग मिली।

अधिकांश भूमि पर पहले से लोगों का कब्जा पाया गया, जिससे एजेंसी को काम रोकना पड़ा।

कब्जे के कारण बढ़ी परेशानी

निर्माण एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिस जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध बताया गया था, वह मौके पर पूरी तरह खाली नहीं मिली।

अब प्रशासन के सामने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की चुनौती है। जब तक जमीन खाली नहीं होगी, तब तक एफएसटीपी का निर्माण शुरू नहीं हो पाएगा।

स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब जमीन पहले से चिह्नित थी और एनओसी भी जारी हो चुकी थी, तो निर्माण शुरू होने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई।

स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ेगा असर

एफएसटीपी के निर्माण में देरी का सीधा असर नगर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ सकता है।

शहरों में बढ़ती आबादी के साथ मल-कीचड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से स्लज ट्रीटमेंट के लिए प्लांट का होना जरूरी है।

प्लांट बनने के बाद सेप्टिक टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित निपटान किया जा सकेगा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

प्रशासन के सामने समाधान की चुनौती

अब प्रशासन को जल्द से जल्द जमीन को कब्जामुक्त कराने और निर्माण कार्य शुरू कराने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

अधिकारियों के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि स्वच्छता से जुड़ी यह महत्वपूर्ण योजना और अधिक समय तक लंबित न रहे।

यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो परियोजना की लागत बढ़ सकती है और लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में भी देरी हो सकती है।

स्थानीय लोगों की उम्मीदें

पीरपैंती नगर पंचायत क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या का जल्द समाधान करेगा और एफएसटीपी का निर्माण शुरू होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक स्वच्छता व्यवस्था के लिए यह प्लांट जरूरी है। इसके बनने से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा और अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सकेगा।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल एफएसटीपी योजना जमीन के पेंच में उलझी हुई है। प्रशासन की ओर से जमीन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

नगर पंचायत और संबंधित विभागों को उम्मीद है कि जल्द ही अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा, ताकि स्वच्छता से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ लोगों को मिल सके।

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