
पटना। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें बिहार की सत्ता की कमान क्यों सौंपी और क्या इस फैसले के पीछे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की कोई भूमिका थी।
दरअसल, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार में पहली बार भाजपा को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली और सम्राट चौधरी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। सबसे बड़ा सवाल यही था कि भाजपा ने सम्राट चौधरी को ही मुख्यमंत्री पद के लिए क्यों चुना।
सम्राट चौधरी ने खुद दिया जवाब
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के करीब पौने पांच महीने बाद सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि एनडीए में सभी फैसले आपसी सहमति और विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं।
उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि गठबंधन के नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच हुई बातचीत के आधार पर लिया गया था। सम्राट चौधरी ने कहा कि एनडीए एक मजबूत गठबंधन है, जहां सभी दल मिलकर निर्णय लेते हैं।
नीतीश कुमार की भूमिका पर बोले CM
सम्राट चौधरी से जब यह सवाल किया गया कि क्या नीतीश कुमार के कहने पर भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, तो उन्होंने इस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एनडीए में किसी भी बड़े फैसले को लेकर सभी पक्षों की राय ली जाती है।
उन्होंने कहा कि बिहार के विकास और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए गठबंधन के नेता फैसले करते हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई व्यक्तिगत फैसला हुआ था।
भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने सम्राट
बिहार में भाजपा लंबे समय से सत्ता में भागीदार रही है, लेकिन अब तक पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री नहीं बना था। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही भाजपा ने बिहार में पहली बार अपने दम पर मुख्यमंत्री पद हासिल किया।
सम्राट चौधरी को पार्टी ने संगठन और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। वह लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पिछड़े वर्ग के प्रमुख नेताओं में उनकी पहचान रही है।
राजनीतिक समीकरणों पर थी नजर
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे राजनीतिक समीकरणों की भी चर्चा रही। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ऐसे में भाजपा ने सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया, ऐसी राजनीतिक चर्चाएं भी सामने आईं।
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके जरिए वह अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकेगी।
NDA में एकजुटता का संदेश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने बयान के जरिए एनडीए की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सभी नेता मिलकर काम करते हैं और सरकार चलाने में सभी सहयोगी दलों की भूमिका होती है।
उनका कहना था कि सरकार का मुख्य उद्देश्य बिहार का विकास और जनता की समस्याओं का समाधान करना है। राजनीतिक फैसलों को लेकर होने वाली चर्चाएं लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सरकार का ध्यान काम पर रहता है।
आगे की राजनीति पर नजर
सम्राट चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार की राजनीति में आने वाले चुनावों और गठबंधन की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा और जदयू दोनों ही एनडीए के तहत अपनी भूमिका को मजबूत करने में जुटे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा ने बिहार में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वहीं, नीतीश कुमार के साथ तालमेल बनाए रखना भी गठबंधन के लिए अहम माना जा रहा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि उनके मुख्यमंत्री बनने का फैसला एनडीए की सामूहिक सहमति से हुआ था। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में चल रही कई अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है।





