
Bihar बिहार: भारतीय रेल के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट न केवल ट्रेनों को समय पर और सुरक्षित संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं, बल्कि कई बार संकट की घड़ी में उनका मानवीय पक्ष भी सामने आता है। ऐसा ही एक उदाहरण पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में देखने को मिला, जहां रेलकर्मियों की सतर्कता और सूझबूझ ने एक बड़ा हादसा टाल दिया।
समस्तीपुर मंडल में हाल ही में तीन अलग-अलग घटनाओं ने यह साबित किया है कि रेलकर्मी न केवल अपने कर्तव्य के प्रति सजग हैं, बल्कि अमूल्य मानव जीवन की रक्षा के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इनमें से एक घटना विशेष रूप से चर्चा में रही, जिसमें सहरसा-समस्तीपुर रेल खंड पर एक मां और उसके बच्चे की जान बचाई गई।
Samastipur division के अंतर्गत सहरसा के लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जयप्रकाश कुमार ने अपनी सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता से एक संभावित दुर्घटना को टाल दिया। बताया गया कि रेल ट्रैक के पास अचानक मां और बच्चा आ गए थे, जिन्हें समय रहते देखकर ट्रेन को नियंत्रित किया गया और दोनों की जान बचा ली गई।
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर रेलकर्मियों की सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता की खूब सराहना की जा रही है। रेलवे प्रशासन ने भी उनके इस साहसिक निर्णय को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया।
24 जून 2026 को पूर्व मध्य रेल समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक ज्योति प्रकाश मिश्रा ने एक सम्मान समारोह आयोजित कर इन रेलकर्मियों को सराहना पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर डीआरएम ने सभी कर्मियों की तत्परता, जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
समारोह के दौरान यह कहा गया कि रेलवे कर्मचारियों का यह व्यवहार न केवल विभाग की छवि को मजबूत करता है, बल्कि यात्रियों और आम जनता के बीच भरोसे को भी बढ़ाता है।
रेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे कर्मियों का प्रदर्शन अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और भविष्य में भी ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, समस्तीपुर मंडल की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि भारतीय रेल के कर्मचारी केवल संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संकट की घड़ी में मानव जीवन बचाने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहते हैं।





