बिहार

सहरसा मॉडल स्कूल विवाद, शिलापट्ट से जमीनदाता का नाम गायब

Saba Naaz
22 July 2026 4:37 PM IST
सहरसा मॉडल स्कूल विवाद, शिलापट्ट से जमीनदाता का नाम गायब
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सहरसा। जिले के सत्तरकटैया प्रखंड स्थित प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया को मॉडल स्कूल का दर्जा मिलने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विद्यालय परिसर में लगाए गए शिलापट्ट पर स्कूल का वास्तविक नाम अंकित नहीं होने से जमीनदाता परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों ने शिक्षा विभाग से शिलापट्ट में जल्द सुधार कर विद्यालय का सही नाम दर्ज करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी भी दी गई है।

जानकारी के अनुसार, सत्तरकटैया प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया को मॉडल स्कूल का दर्जा मिलने से क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल था। लेकिन उद्घाटन के बाद विद्यालय परिसर में लगाए गए शिलापट्ट को देखकर स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। शिलापट्ट पर विद्यालय का नाम 'सरस्वती विद्या निकेतन आदर्श विद्यालय, सत्तरकटैया' अंकित किया गया है, जबकि प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया का कहीं उल्लेख नहीं है।

स्थानीय लोगों और जमीनदाता परिवार का कहना है कि यह विद्यालय वर्षों पुराना है और इसकी पहचान प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया के नाम से ही है। ऐसे में शिलापट्ट पर विद्यालय के वास्तविक नाम को जगह नहीं देना ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज करने जैसा है। लोगों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए शिक्षा विभाग से तत्काल सुधार की मांग की है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद जमीनदाता परिवार के वंशज प्रीतेश सिंह सोनू और ज्ञानेन्द्र नारायण सिंह के नेतृत्व में स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल विद्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय के प्राचार्य विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर शिलापट्ट पर अंकित नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी ली।

इस प्रतिनिधिमंडल में जिला जदयू उपाध्यक्ष सह जिला प्रवक्ता भीम नारायण महतो, दिलीप सिंह, अनिल सिंह, शंभू सिंह, शारदानंद सिंह, रत्न सिंह, मुखिया राजकुमार चौधरी, ब्रजेश महतो और लक्ष्मी राय समेत कई स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि विद्यालय की पुरानी पहचान और इतिहास से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

प्राचार्य विवेकानंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि शिलापट्ट शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार लगाया गया है। हालांकि स्थानीय लोग इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि विभागीय प्रक्रिया के बावजूद विद्यालय के मूल नाम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

जमीनदाता परिवार के सदस्यों ने कहा कि विद्यालय की स्थापना और विकास में जमीन देने वाले परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में विद्यालय की पहचान से जुड़े नाम को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि शिलापट्ट में तत्काल संशोधन कर प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया का नाम दर्ज किया जाए।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही शिक्षा विभाग द्वारा इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसके साथ ही जमीनदाता परिवार ने न्यायालय की शरण लेने की भी चेतावनी दी है।

फिलहाल विवाद के बाद सभी की नजर शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही मामले का समाधान करेगा और विद्यालय की पुरानी पहचान को बरकरार रखा जाएगा।

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