रोहतास: 14 फरवरी प्रेमी जोड़े के लिए खास दिन रहा. इस दिन दोनों एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं. इसी दिन बिहार के रोहतास में एक ऐसी घटना घटी जिसे लोग सच्चा प्यार की निशानी मान रहे हैं. एक साथ जीने मरने की कसमें क्या होती है इसका जीता जागता उदाहरण देखने को मिला.
रोहतास में बुजुर्ग दंपती का निधन: रोहतास के संझौली के जिगनी ग्राम निवाली अवध बिहारी पांडे(85) अचानकर से गिर पड़े. उन्हें हल्की चोटे आयी. परिजनों के द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. निधन की खबर जैसे ही उनकी पत्नी देवमातो देवी(83) को पड़ी उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली और फिर कभी नहीं खोली.
एक साध दुनिया को अलविदा: वैलेंटाइन डे के दिन दंपती का निधन से सभी हैरान थे, लेकिन यही सच्चाई थी. बुजुर्ग दपंती ने एक ही दिन अपना प्राण त्याग दिए. एक साथ जीने मरने की कसमें खाने वाले अवध बिहारी पांडे और देवमातो देवी एक साध दुनिया को अलविदा कह गए. इस घटना से जहां घर में शोक का माहौल है, वहीं लोग इसे असली प्यार का उदाहरण दे रहे हैं.
"एक साथ माता पिता की मौत से दुःख तो हुआ पर सकून इस बात का रहा कि जीवन के अंतिम सफर की यात्रा भी दोनों ने साथ किया. -कमलेश पांडे, पुत्र
एक ही चिता पर अंतिम संस्कार: बेटों ने माता पिता के आजीवन इस प्रेम को कड़ी को तब और गहरा बना दिया जब उनकी अंतिम संस्कार भी एक ही चिता पर बक्सर के मुक्तिधाम में की गई. माता पिता की मौत के बाद उनके दोनों पुत्रों ने एक साथ संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी. इस अंतिम संस्कार में पूरे गांव के लोग शामिल हुए.





