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पटना। बिहार के जमुई में दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित मारपीट और छात्रा से बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने मंगलवार को राज्य सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बिहार में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने राज्य की स्थिति के लिए 'राक्षस राज' जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि अपराध बढ़ने की वजह अपराधियों को सत्ता से संरक्षण मिलना है। ये आरोप RJD सांसद के राजनीतिक दावे हैं; राज्य प्रशासन की कार्रवाई में अब तक गिरफ्तारियां और विशेष जांच दल का गठन भी शामिल है।सुधाकर सिंह का बयान जमुई की उस घटना के बाद आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। पुलिस के मुताबिक घटना 19 सितंबर की शाम हुई थी। वीडियो में नाबालिग छात्र-छात्रा को कुछ लोगों द्वारा रोकने, युवक के साथ मारपीट और छात्रा के साथ कथित बदसलूकी करते देखा गया। पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट समेत संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है।
सुधाकर सिंह ने सरकार पर लगाए आरोप
RJD सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के हौसले बढ़ने के पीछे उन्हें मिलने वाला कथित राजनीतिक संरक्षण है।सिंह ने प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी कुंदन कृष्णन से जुड़े एक कथित फर्जी एनकाउंटर मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि कार्रवाई नहीं होने से अधिकारियों में जवाबदेही का डर कम हुआ है। उनके इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है, इसलिए इसे उनके राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शराब और जमीन माफिया को लेकर भी साधा निशाना
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब और जमीन माफिया का प्रशासन पर प्रभाव है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं, बच्चों और आम लोगों के खिलाफ अपराध बढ़ते हैं।उन्होंने जमुई की घटना को अकेली घटना मानने से इनकार करते हुए हाल की दूसरी घटनाओं का हवाला दिया और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि जमुई मामले में पुलिस की ओर से आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारियां और विशेष जांच दल गठित करने जैसी कार्रवाइयां की गई हैं।
क्या है जमुई का पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक घटना 19 सितंबर को जमुई जिले में हुई थी। दो नाबालिग छात्र कोचिंग के बाद लौट रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में छात्र और छात्रा को घेरकर परेशान किए जाने के दृश्य दिखाई दिए। छात्रा के साथ कथित तौर पर अश्लील हरकत और उसके साथी के साथ मारपीट की गई।वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया, पीड़ितों की पहचान की और मामला दर्ज किया। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों को पकड़ा और बाकी आरोपियों की तलाश के लिए विशेष जांच दल का गठन किया।
मुख्य आरोपी नंदन यादव भी गिरफ्तार
मंगलवार को मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।रिपोर्टों के अनुसार नंदन यादव के साथ एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़ गई। पुलिस ने अब तक घटना से जुड़े सात लोगों की पहचान करने की बात कही है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है।
वायरल वीडियो शेयर करने वालों पर भी कार्रवाई
जमुई पुलिस ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में भी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा करना गंभीर कानूनी मामला है।ऐसे मामलों में पीड़ित नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पुलिस ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से वीडियो को साझा नहीं करने की अपील भी की है।
घटना पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
जमुई की घटना के बाद बिहार में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है।RJD सांसद सुधाकर सिंह का बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। उन्होंने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि जमुई मामले में पुलिस ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं और आगे की जांच जारी है।
SIT कर रही मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल बनाया गया है। पुलिस वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान और भूमिका की जांच कर रही है।पुलिस कार्रवाई के बावजूद इस घटना ने बिहार में नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष इसे राज्य की कानून-व्यवस्था से जोड़ रहा है, जबकि मामले में प्रशासन की ओर से जांच और गिरफ्तारियों की प्रक्रिया जारी है।
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