बिहार

सीतामढ़ी में 834 साल पुराने श्रीरामजानकी मठ के जीर्णोद्धार का शुभारंभ, धार्मिक विरासत को मिलेगा नया स्वरूप

Saba Naaz
29 July 2026 9:59 PM IST
सीतामढ़ी में 834 साल पुराने श्रीरामजानकी मठ के जीर्णोद्धार का शुभारंभ, धार्मिक विरासत को मिलेगा नया स्वरूप
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सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित 834 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक श्रीरामजानकी मठ के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर किया गया। रामायण रिसर्च काउंसिल की पहल पर आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ देखा और इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीरामजानकी मठ जैसे प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और रामायण से जुड़ी धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जीर्णोद्धार कार्यक्रम का आयोजन रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में किया गया। पंडित धूपेश्वर झा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई और विधि-विधान के अनुसार निर्माण कार्य प्रारंभ कराया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शुरू हुए इस कार्य को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।

इस अवसर पर सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, बिहार सरकार की मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता और सीतामढ़ी विधायक सुनील कुमार पिंटू भी कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मठ के जीर्णोद्धार कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने इसे सीतामढ़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

बताया गया कि श्रीरामजानकी मठ के पुनर्निर्माण और संरक्षण की पहल पहले ही शुरू हो चुकी थी। 25 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा मठ के शिलापूजन का कार्यक्रम किया गया था। उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए अब रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से जीर्णोद्धार कार्य को गति दी गई है।

श्रीरामजानकी मठ निर्माण समिति, राघोपुर बखरी के प्रभारी विजय कुमार ने बताया कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मठ के जीर्णोद्धार का उद्देश्य केवल भवन का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखना भी है।

रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी राजीव सिंह ने कहा कि श्रीरामजानकी मठ केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह मां जानकी की पावन जन्मभूमि की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस मठ का संरक्षण भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा और देश की प्राचीन धरोहरों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि जीर्णोद्धार कार्य को जनसहभागिता के साथ पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसमें श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और धार्मिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा, ताकि मठ को एक बेहतर धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

कार्यक्रम में रामायण रिसर्च काउंसिल के अंतर्गत गठित सीता सखी समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अंजना प्रकाश ने सभी संतों, जनप्रतिनिधियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल एक संस्था का नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मभूमि के रूप में धार्मिक महत्व प्राप्त है। ऐसे में श्रीरामजानकी मठ का जीर्णोद्धार क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेगा। माना जा रहा है कि मठ के विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

834 वर्ष पुराने इस मठ के जीर्णोद्धार की शुरुआत को स्थानीय लोगों ने ऐतिहासिक अवसर बताया। गुरु पूर्णिमा के दिन शुरू हुआ यह कार्य सीतामढ़ी की धार्मिक विरासत को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह मठ भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा और आध्यात्मिक आस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना सकता है।

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