बिहार

लैब से खेत तक पहुंचे शोध, पूसा में कुलपति की अनोखी पहल

Saba Naaz
11 July 2026 3:22 PM IST
लैब से खेत तक पहुंचे शोध, पूसा में कुलपति की अनोखी पहल
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पूसा (समस्तीपुर)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा में शनिवार को आयोजित धान रोपाई मिलन कार्यक्रम में कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने स्वयं खेत में उतरकर छात्रों और वैज्ञानिकों के साथ धान की रोपनी की। इस दौरान उन्होंने कृषि शिक्षा को केवल किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को खेत की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने पर जोर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक कृषि शिक्षा प्रदान करना और उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना था। कुलपति ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए जरूरी है कि विद्यार्थी और शोधकर्ता सीधे खेतों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए काम करें।

धान रोपाई कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया। छात्रों को आधुनिक धान उत्पादन तकनीक, रोपाई की वैज्ञानिक विधियों और फसल प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इस मौके पर विद्यार्थियों ने खेत में काम करने का अनुभव प्राप्त किया और कृषि कार्यों की बारीकियों को करीब से समझा।

कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने कहा कि कृषि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रयोगशालाओं में किए जा रहे अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा इसी सोच पर आधारित है, जिसमें वैज्ञानिक शोध को खेतों तक पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल नई तकनीकों का विकास करना नहीं है, बल्कि उन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना भी है। इसके लिए छात्रों और कृषि वैज्ञानिकों का खेतों से जुड़ाव बेहद जरूरी है। जब विद्यार्थी खेती की वास्तविक चुनौतियों को समझेंगे, तभी वे किसानों के लिए उपयोगी समाधान तैयार कर पाएंगे।

कार्यक्रम में छात्रों को धान की आधुनिक रोपाई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और लागत को भी कम किया जा सकता है। छात्रों ने खेत में उतरकर रोपाई की प्रक्रिया को समझा और कृषि कार्यों के व्यावहारिक पहलुओं को जाना।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन छात्रों में कृषि के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें भविष्य के कृषि विशेषज्ञ के रूप में तैयार करने के उद्देश्य से किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को कक्षा और प्रयोगशाला में सीखी गई जानकारी को वास्तविक खेतों में लागू करने का अवसर मिलता है।

कुलपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकों का विकास और उनका सही इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे कृषि अनुसंधान को समाज और किसानों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में काम करें।

धान रोपाई कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कृषि शिक्षा और अनुसंधान का अंतिम लक्ष्य किसानों तक पहुंचना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है। ‘लैब टू लैंड’ की सोच के साथ पूसा कृषि विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

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