बिहार

नई खेती में कीटों से परेशान किसानों को राहत, पौधा संरक्षण अधिकारी ने बताए

Payal
1 Jun 2026 9:42 PM IST
नई खेती में कीटों से परेशान किसानों को राहत, पौधा संरक्षण अधिकारी ने बताए
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Bihar बिहार : बिहार में बड़ी आबादी आज भी खेती-किसानी पर निर्भर है। हालांकि समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहा है। अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फल और सब्जियों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। अधिक मुनाफे और बाजार में बढ़ती मांग के कारण बागवानी आधारित खेती किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है।

लेकिन फल और सब्जी की खेती जितनी लाभदायक मानी जाती है, उतनी ही चुनौतियों से भी भरी होती है। इस खेती में कीटों और रोगों का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाता है। कई बार फसलों पर कीटों का हमला इतना अधिक हो जाता है कि उत्पादन प्रभावित होने लगता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कीट प्रबंधन और रोग नियंत्रण के सही उपायों की जानकारी नहीं होने के कारण कई किसान परेशान हो जाते हैं।

इसी समस्या को देखते हुए पौधा संरक्षण अधिकारी सुजीत पाल ने किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि सही समय पर निगरानी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसलों को कीटों और बीमारियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

सुजीत पाल के अनुसार किसानों को सबसे पहले अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। फसलों की पत्तियों, तनों और फलों पर किसी भी प्रकार के कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में नियंत्रण करने से नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि खेतों में साफ-सफाई बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। खरपतवार और संक्रमित पौधों के अवशेष कई बार कीटों और रोगों के पनपने का कारण बनते हैं। इसलिए खेत को स्वच्छ रखना और समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है।

पौधा संरक्षण अधिकारी ने जैविक और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार रासायनिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग करने के बजाय जैविक उपायों और संतुलित कीटनाशक उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है और पर्यावरण पर भी कम असर पड़ता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। यदि किसी फसल में गंभीर रोग या कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद ही दवाओं का उपयोग करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से फल एवं सब्जी की खेती को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाया जा सकता है। सही जानकारी और समय पर किए गए उपाय किसानों को बड़े नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।

कुल मिलाकर, फल और सब्जी की खेती में आने वाली चुनौतियों से घबराने की जरूरत नहीं है। उचित कीट प्रबंधन, नियमित निगरानी और विशेषज्ञों की सलाह से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं।

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