
बिहार: संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा संत वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सनातन परंपरा और साधु-संतों की गरिमा के खिलाफ बताया है। विहिप के उत्तर बिहार प्रांत मंत्री रणवीर कुमार ने विपक्षी नेताओं पर धार्मिक प्रतीकों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से हिंदू समाज की आस्था और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
रणवीर कुमार ने कहा कि संसद परिसर में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के अन्य सांसदों द्वारा संत वेश धारण कर किया गया प्रदर्शन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, संतों का वेश भारतीय संस्कृति में त्याग, तपस्या, सेवा और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। ऐसे पवित्र प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के लिए करना उचित नहीं है।
विहिप नेता ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक मुद्दों को उठाने के लिए धार्मिक प्रतीकों का सहारा लिया, जो करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की पहचान और उनके पहनावे को किसी राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
रणवीर कुमार ने अपने बयान में संत वेश को लेकर पौराणिक उदाहरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संत वेश का विशेष सम्मान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रकार रावण ने छल करने के लिए संत का छद्म रूप धारण किया था, उसी तरह विपक्षी नेताओं ने भी धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर समाज की भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया है।
उन्होंने विपक्षी दलों पर हिंदू समाज की भावनाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने सनातन परंपराओं को लेकर विवादित रुख अपनाया है। रणवीर कुमार ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के समय भी विपक्षी दलों ने कई तरह के विरोध किए थे और अब मंदिर निर्माण के बाद भी ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।
विहिप नेता ने कहा कि हिंदू समाज धैर्य और सहिष्णुता में विश्वास रखता है, लेकिन धार्मिक आस्थाओं को बार-बार निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपनी बात रखें और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान करें।
उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन धर्म और आस्था को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। लोकतंत्र में हर दल को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे किसी समुदाय या धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे।
संसद परिसर में हुए इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे अपने मुद्दों को उठाने का तरीका बता रहा है, वहीं विहिप जैसे संगठनों ने इसे धार्मिक प्रतीकों के अपमान से जोड़ते हुए विरोध जताया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।





