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Patna पटना: भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा स्पेशल इलेक्टोरल रिव्यू (SIR) के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखे जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह किसी का भी अधिकार है और ममता बनर्जी का तो अधिकार ही है, क्योंकि वे वहां की मुख्यमंत्री हैं। राजू ने कहा कि चुनाव से पहले राजनीतिक हस्तियों और अन्य लोगों द्वारा अदालत का रुख करना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा, "बिहार में भी चुनाव से पहले कई लोग कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट भी गए। मुझे लगता है कि इस बार पश्चिम बंगाल में भी वही स्थिति देखने को मिलेगी जो बिहार में हुई थी।"
उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव आयोग संविधान के तहत अपने निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उनका कहना था कि आयोग का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना और लोकतंत्र के हित में कदम उठाना है। राजीव प्रताप रूडी ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक नेताओं को अपनी मांगों के लिए कानूनी या संवैधानिक मार्ग अपनाने का अधिकार है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनका अनुमान है कि इस प्रयास में ममता बनर्जी को कोई विशेष सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने जोड़ा, "बिहार के अनुभव के बाद यह प्रमाणित हो गया है कि SIR देश के लिए हितकारी है।"
भाजपा सांसद ने SIR के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रणाली निर्वाचनों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि SIR के माध्यम से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में गहन समीक्षा संभव होती है, जो लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है। राजू ने यह भी उल्लेख किया कि राजनीतिक दलों और नेताओं को अपनी मांगों या असंतोष को संवैधानिक और कानूनी तरीके से व्यक्त करना चाहिए, ताकि लोकतंत्र की प्रक्रिया बाधित न हो। उन्होंने यह संकेत दिया कि बिहार में SIR की सफलता और इसके सकारात्मक परिणाम पश्चिम बंगाल में भी समान रूप से लागू हो सकते हैं।
राजीव प्रताप रूडी के इस बयान से स्पष्ट है कि भाजपा का रुख SIR के पक्ष में है और पार्टी इस प्रणाली को देश में चुनावों की पारदर्शिता बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा भेजे गए पत्र को उनके संवैधानिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया, लेकिन इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से परिणामहीन भी बताया। इस मामले में राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि SIR जैसे कदमों के कारण चुनावी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और धांधली की संभावनाओं को कम किया जा सकता है, और बिहार का अनुभव यह दिखाता है कि यह प्रणाली प्रभावी साबित हुई है। इस तरह, राजीव प्रताप रूडी ने न केवल ममता बनर्जी के अधिकार को स्वीकार किया, बल्कि SIR के महत्व और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया। उनके बयान से यह संदेश स्पष्ट है कि भाजपा SIR के पक्ष में है और इसे लोकतंत्र के हित में जरूरी मानती है।
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