
Bihar बिहार: बक्सर जिले के डुमरांव में वर्षों से जाम की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत बनने वाली पश्चिमी रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) परियोजना एक बार फिर प्रशासनिक उलझनों में फंस गई है। करीब 57.44 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य पिछले एक महीने से पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है।
यह परियोजना डुमरांव शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, क्योंकि रेलवे फाटक पर बार-बार लगने वाले जाम से आम लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरओबी बनने के बाद इस समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अब वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को लेकर रेलवे और वन विभाग के बीच मतभेद के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के अगले चरण की शुरुआत वन विभाग से एनओसी न मिलने के कारण रुकी हुई है। रेलवे के अधिकारी सुजीत सिंह ने बताया कि विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक अनुमति का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब तक वन विभाग से मंजूरी प्राप्त नहीं हुई है, जिससे निर्माण कार्य बाधित है।
वहीं दूसरी ओर भोजपुर के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) प्रदुमन गौरव ने रेलवे के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि रेलवे की ओर से गलत प्रक्रिया अपनाकर पेड़ कटाई की अनुमति मांगी गई है। उनके अनुसार, जिस भूमि पर पेड़ मौजूद हैं, वह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए पहले रेलवे को भूमि संबंधी अनुमति केंद्र सरकार से प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही वन विभाग पेड़ों की कटाई की अनुमति पर विचार कर सकता है।
इस प्रशासनिक असहमति के कारण परियोजना का काम पूरी तरह रुक गया है। पिछले एक महीने से निर्माण स्थल पर कोई गतिविधि नहीं हो रही है, जिससे न केवल परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो रही है, बल्कि लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डुमरांव में रेलवे फाटक पर जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सुबह और शाम के समय वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे मरीजों, स्कूली बच्चों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों को उम्मीद थी कि आरओबी बनने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन अब परियोजना के अटक जाने से निराशा बढ़ गई है।
व्यापारियों का भी कहना है कि जाम की वजह से बाजारों पर असर पड़ता है और ग्राहक समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। आरओबी को क्षेत्र के विकास के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी अक्सर देरी का कारण बनती है। जब तक भूमि, पर्यावरण और वन विभागों के बीच स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं होगी, तब तक ऐसी योजनाएं समय पर पूरी करना मुश्किल रहेगा।
रेलवे और वन विभाग के बीच जारी इस मतभेद को सुलझाने के लिए उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई जा रही है। यदि जल्द ही एनओसी और भूमि अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो परियोजना और अधिक समय के लिए अटक सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने भी माना है कि यह मामला तकनीकी और प्रक्रियात्मक मतभेद का है, जिसे संबंधित विभागों के बीच बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द ही सभी बाधाएं दूर कर निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सके।
कुल मिलाकर, डुमरांव की यह महत्वपूर्ण आरओबी परियोजना फिलहाल विभागीय खींचतान और अनुमति प्रक्रिया के कारण ठप पड़ी है। रेलवे और वन विभाग के बीच एनओसी को लेकर जारी विवाद ने स्थानीय लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जबकि जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है।





