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IIT BHU के प्रोफेसर ब्रह्मेश्वर मिश्रा को मिला ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान

Kavita2
27 Oct 2026 4:02 PM IST
IIT BHU के प्रोफेसर ब्रह्मेश्वर मिश्रा को मिला ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान
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वाराणसी/नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), यानी आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी के लिए गौरव का क्षण सामने आया है। संस्थान के भैषजकीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा को प्रतिष्ठित ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया है। फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और शैक्षणिक क्षेत्र में उनकी चार दशकों से अधिक लंबी सेवाओं को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया।

फार्मेसी शिक्षा के नियामक निकाय फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की ओर से मंगलवार, 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के द्वारका स्थित आईटीसी होटल में आयोजित समारोह में प्रो. मिश्रा को सम्मानित किया गया। यह सम्मान फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान, समर्पण और विशिष्ट सेवाओं की पहचान के रूप में दिया गया है।

42 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में योगदान

प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा आईआईटी (बीएचयू) के वरिष्ठतम शिक्षकों में शामिल हैं। उन्होंने संस्थान में 42 वर्षों से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने शिक्षण, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के माध्यम से फार्मेसी शिक्षा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल उसके संसाधनों और उपलब्धियों से नहीं, बल्कि वहां कार्यरत शिक्षकों की विद्वता, अनुभव और समर्पण से भी होती है। प्रो. मिश्रा का लंबा शैक्षणिक सफर इसी प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

चार दशकों से अधिक लंबे सेवाकाल में उन्होंने फार्मेसी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और शोध के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनके योगदान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि फार्मेसी शिक्षा लगातार बदलती वैज्ञानिक आवश्यकताओं और स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों से जुड़ी हुई है।

नई दिल्ली में आयोजित समारोह में मिला प्रतिष्ठित सम्मान

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में प्रो. मिश्रा को ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पीसीआई देश में फार्मेसी शिक्षा के नियमन और शैक्षणिक मानकों से जुड़ा प्रमुख वैधानिक निकाय है। इसका उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा में निर्धारित मानकों को बनाए रखना और इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

ऐसे नियामक निकाय की ओर से किसी वरिष्ठ शिक्षाविद् को सम्मानित किया जाना शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे योगदान के महत्व को रेखांकित करता है।

विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

प्रो. मिश्रा के शैक्षणिक योगदान का एक प्रमुख पक्ष विद्यार्थियों का मार्गदर्शन रहा है। उच्च शिक्षा में शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, उन्हें अनुसंधान के लिए प्रेरित करना और पेशेवर चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

प्रो. मिश्रा ने अपने लंबे कार्यकाल में शिक्षण और शोध को प्राथमिकता देते हुए इसी दिशा में योगदान दिया है। फार्मेसी जैसे तकनीकी और वैज्ञानिक विषय में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ अनुसंधान की समझ देना विशेष महत्व रखता है।

उनकी सेवाएं इस बात को भी रेखांकित करती हैं कि अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक गुणवत्ता और शोध संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दवा वितरण प्रणाली और नैनोमेडिसिन पर विशेष शोध

प्रो. मिश्रा का शोध कार्य फार्मास्यूटिक्स, फार्माकोकाइनेटिक्स, आधुनिक दवा वितरण प्रणाली, कैंसर उपचार और नैनोमेडिसिन जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। आईआईटी (बीएचयू) की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनके नाम 270 से अधिक शोध प्रकाशन दर्ज हैं। यह उनके व्यापक अनुसंधान कार्य और वैज्ञानिक योगदान को दर्शाता है।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में दवाओं को शरीर के प्रभावित हिस्से तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। नई दवा वितरण प्रणालियों और नैनोमेडिसिन पर अनुसंधान का उद्देश्य उपचार को अधिक लक्षित और प्रभावी बनाने की संभावनाएं तलाशना है।

प्रो. मिश्रा ने इन विषयों से संबंधित अनुसंधान के माध्यम से फार्मास्यूटिकल विज्ञान के विकास में योगदान दिया है। उनके शोध क्षेत्रों में कैंसर, डायबिटिक घावों के उपचार, दर्द और सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित दवा वितरण तकनीकें भी शामिल रही हैं।

पहले भी मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान

प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा की शैक्षणिक उपलब्धियों को इससे पहले भी विभिन्न मंचों पर मान्यता मिल चुकी है। वर्ष 2023 में उन्हें प्रोफेसर एम.एल. श्रॉफ मेमोरियल फार्मा रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें वर्ष 2022 में नेशन बिल्डर अवॉर्ड और वर्ष 2020 में फार्मा लीजेंड अवॉर्ड भी मिल चुका है।

वर्ष 2018 में फार्मास्यूटिक्स क्षेत्र में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्राप्त करना भी उनके शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। ये सम्मान शिक्षा, शोध और फार्मेसी क्षेत्र में उनकी निरंतर सक्रियता को दर्शाते हैं।

फार्मेसी शिक्षा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नई दवाओं का विकास, उनकी गुणवत्ता, प्रभावशीलता और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित फार्मासिस्ट तथा शोधकर्ताओं की आवश्यकता होती है।

ऐसी स्थिति में प्रो. मिश्रा जैसे अनुभवी शिक्षाविदों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। उनके लंबे शैक्षणिक अनुभव से यह संदेश मिलता है कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए निरंतर अध्ययन, अनुसंधान और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण आवश्यक है।

उनकी उपलब्धि युवा शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह सम्मान बताता है कि शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक किया गया समर्पित कार्य राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त कर सकता है।

आईआईटी बीएचयू की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मिला नया गौरव

प्रो. ब्रह्मेश्वर मिश्रा को मिला यह सम्मान आईआईटी (बीएचयू) के शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। फार्मेसी शिक्षा में 42 वर्षों से अधिक का उनका योगदान संस्थान की दीर्घकालीन शैक्षणिक परंपरा को भी रेखांकित करता है।

शिक्षण और अनुसंधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई है। ‘भैषजी शिक्षा रत्न’ सम्मान उनकी इसी लंबी शैक्षणिक यात्रा और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में निभाई गई भूमिका को मान्यता देता है।

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