बिहार

बिहार में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने की तैयारी

Kavita2
30 Sept 2026 9:43 AM IST
बिहार में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने की तैयारी
x

पटना। बिहार सरकार किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे राज्य कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। योजना लागू होने पर बिहार के एक करोड़ से अधिक किसानों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। फिलहाल राज्य सरकार किसानों को सिंचाई के लिए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करा रही है।

सरकार की नई योजना का उद्देश्य खेती की लागत कम करना और किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती एवं आसानी से उपलब्ध बिजली देना है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई की लागत किसानों के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती है। खासकर डीजल पंप या अन्य साधनों से सिंचाई करने वाले किसानों को ज्यादा खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में मुफ्त बिजली की व्यवस्था लागू होने से किसानों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।

ऊर्जा विभाग ने सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की भी तैयारी की है। अगले तीन वर्षों के दौरान खेती से जुड़े 2560 फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इन फीडरों के माध्यम से करीब 2585 मेगावाट बिजली तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस परियोजना पर राज्य सरकार करीब 2714 करोड़ रुपये खर्च करेगी। कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का उद्देश्य किसानों को नियमित बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऊर्जा कंपनियों का खर्च कम करना भी है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से पारंपरिक बिजली खरीद पर निर्भरता घटेगी और कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।

वर्तमान समय में कृषि के लिए बिजली खरीदने पर ऊर्जा कंपनियों को प्रति यूनिट लगभग 6 रुपये 19 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके मुकाबले किसानों से सिंचाई के लिए केवल 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से शुल्क लिया जा रहा है। इस अंतर का बड़ा हिस्सा सरकार को सब्सिडी के रूप में वहन करना पड़ता है। यदि कृषि फीडरों से बड़ी मात्रा में सौर ऊर्जा मिलने लगेगी तो बिजली खरीद की लागत में कमी आ सकती है।

सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से सरकार को लंबे समय में वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों को दिन के समय बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग विशेष रूप से सिंचाई के मौसम में बढ़ जाती है। ऐसे में अलग-अलग कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने से बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने की संभावना है।

योजना के तहत अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। 2560 फीडरों से 2585 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य बड़ा माना जा रहा है। इससे कृषि क्षेत्र के लिए अलग से हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी और किसानों को सिंचाई के समय बिजली की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी।

मुफ्त बिजली योजना लागू होने से छोटे और सीमांत किसानों को खासतौर पर राहत मिलने की उम्मीद है। कई किसान सिंचाई के लिए बिजली और डीजल दोनों पर निर्भर रहते हैं। मुफ्त बिजली मिलने की स्थिति में उन्हें उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। इसका असर खेती की कुल लागत और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।

बिहार में बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इन फसलों के लिए समय पर सिंचाई बेहद जरूरी होती है। बिजली की उपलब्धता और उसकी लागत खेती की उत्पादकता को सीधे प्रभावित करती है। इसी कारण सरकार सिंचाई के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

ऊर्जा विभाग की योजना में सौर ऊर्जा को अहम स्थान दिया गया है। सौर परियोजनाओं से तैयार होने वाली बिजली को कृषि फीडरों से जोड़ा जाएगा। इससे दिन के समय उपलब्ध सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल सीधे कृषि बिजली उत्पादन में किया जा सकेगा। इससे ऊर्जा कंपनियों को बाजार से महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम हो सकती है।

हरित ऊर्जा के इस्तेमाल से पर्यावरणीय लाभ भी मिलने की संभावना है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन में पारंपरिक ईंधन की जरूरत नहीं होती। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल राज्य के ऊर्जा ढांचे में भी बदलाव ला सकता है।

मुफ्त सिंचाई बिजली का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लागू होने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके लिए ऊर्जा विभाग और संबंधित बिजली कंपनियों को आवश्यक व्यवस्थाएं करनी होंगी। योजना के क्रियान्वयन से पहले पात्र किसानों, कृषि कनेक्शन और बिजली खपत से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया जा सकता है।

फिलहाल किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है, जो पहले से ही रियायती है। प्रस्तावित योजना के तहत यदि यह शुल्क पूरी तरह समाप्त किया जाता है तो किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर सीधा खर्च नहीं करना पड़ेगा।

सरकार की यह तैयारी कृषि और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाली बड़ी पहल मानी जा रही है। एक ओर किसानों को मुफ्त बिजली देकर खेती की लागत कम करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर 2714 करोड़ रुपये खर्च कर 2585 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद योजना की विस्तृत तस्वीर और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी।

Next Story