
बिहार: वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में नवादा जिले के रजौली प्रखंड में चल रहा जनगणना 2027 का प्री-टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस परीक्षण के दूसरे चरण के समापन पर जनगणना निदेशालय, पटना की टीम ने प्रगणकों और पर्यवेक्षकों से फीडबैक लिया और फील्ड में आने वाली समस्याओं की जानकारी जुटाई।
भारत सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2027 की जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल मोड में कराई जाएगी। इसमें कागज के बजाय मोबाइल एप और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी नई व्यवस्था को परखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्री-टेस्ट कराया जा रहा है। बिहार में इसके लिए सोनपुर के अलावा नवादा जिले के रजौली प्रखंड को भी पायलट क्षेत्र के रूप में चुना गया है।
रजौली प्रखंड की तीन पंचायतों जोगियामारण, सिरोडावर और चितरकोली को इस पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। यहां डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया को समझने और उसकी व्यवहारिक चुनौतियों को जानने के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की टीम ने घर-घर जाकर डाटा संग्रह किया।
प्री-टेस्ट की शुरुआत एक से तीन जुलाई तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम से हुई। इस दौरान रजौली प्रखंड के 87 प्रगणकों और 15 पर्यवेक्षकों को नए जनगणना ऐप, डाटा एंट्री प्रक्रिया और सर्वेक्षण के तरीके की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के बाद चार और पांच जुलाई को ग्रामीणों द्वारा स्वगणना की प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके बाद छह जुलाई से 18 जुलाई तक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की टीम ने तीनों पंचायतों के प्रत्येक घर का दौरा किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों की जानकारी, आवास की स्थिति, शौचालय, पेयजल सुविधा, आय और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से संबंधित आंकड़े मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज किए गए।
प्री-टेस्ट के अंतिम दिन जनगणना निदेशालय पटना से पहुंचे सहायक निदेशक रोहित गुप्ता ने रजौली प्रखंड सभागार में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की। उन्होंने डिजिटल सर्वे के दौरान आने वाली परेशानियों और अनुभवों को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में जनगणना के नोडल पदाधिकारी अनूप कुमार वर्मा और सौरभ कुमार भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने बताया कि प्रगणकों से ऐप के इस्तेमाल, डाटा एंट्री, जीपीएस लोकेशन, फोटो अपलोड करने और नेटवर्क संबंधी समस्याओं को लेकर फीडबैक लिया गया। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों ने ग्रामीणों के सवालों और तकनीकी परेशानियों से अधिकारियों को अवगत कराया। इन सभी सुझावों को एक रिपोर्ट के रूप में जनगणना निदेशालय को भेजा जाएगा, ताकि वास्तविक जनगणना के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
अधिकारियों के अनुसार, प्री-टेस्ट के बाद 19 और 20 जुलाई को रिवीजनल राउंड चलाया जाएगा। इस दौरान उन परिवारों को दोबारा शामिल किया जाएगा, जो किसी कारणवश पहले चरण में सर्वे से छूट गए थे। इसका उद्देश्य शत-प्रतिशत डाटा कवरेज सुनिश्चित करना है।
जनगणना अधिकारियों ने साफ किया कि यह पूरी प्रक्रिया केवल अभ्यास के तौर पर की जा रही है। वास्तविक जनगणना फरवरी 2027 से पूरे देश में शुरू होगी और इस बार इसमें कागज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मोबाइल ऐप आधारित डिजिटल प्रणाली से डाटा संग्रह, निगरानी और प्रबंधन को आसान बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से समय की बचत होगी और आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ेगी। इसके अलावा डाटा को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करने और जरूरत के अनुसार उपयोग करने में भी सुविधा मिलेगी। नवादा के रजौली में सफल प्री-टेस्ट को डिजिटल जनगणना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





