बिहार

संस्कृत विवि में नए PG पाठ्यक्रम की तैयारी पूरी

Kavita2
10 July 2026 5:21 PM IST
संस्कृत विवि में नए PG पाठ्यक्रम की तैयारी पूरी
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दरभंगा : लोकभवन पटना के निर्देशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के अनुरूप कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में दो वर्षीय आचार्य (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रम निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तैयार किए गए इस नए पाठ्यक्रम को आगामी 14 जुलाई को आयोजित होने वाली विद्वत परिषद की बैठक में स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय की अध्यक्षता में तैयार किए गए इस नवनिर्मित पाठ्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत शिक्षा को आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है। नए पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों को शामिल करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन और शोध के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

आचार्य पाठ्यक्रम समिति की बैठक में लिया गया निर्णय

शुक्रवार को विश्वविद्यालय में आयोजित आचार्य पाठ्यक्रम समिति की बैठक में पाठ्यक्रम से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने और इसे विद्वत परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में समिति के सदस्यों ने पाठ्यक्रम की संरचना, विषयों की उपयोगिता और नई शिक्षा नीति के अनुरूप आवश्यक बदलावों पर विचार-विमर्श किया। समिति ने पाठ्यक्रम को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक अध्ययन पद्धतियों की जानकारी भी मिल सके।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) डॉ. निशिकांत ने जानकारी देते हुए बताया कि पाठ्यक्रम निर्माण का कार्य तेजी से पूरा किया गया है। अब इसे विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद की स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।

विद्वत परिषद की स्वीकृति के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि 14 जुलाई को प्रस्तावित विद्वत परिषद की बैठक में पाठ्यक्रम को मंजूरी मिलने के बाद इसे बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को भेजा जाएगा। वहां से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास लोकभवन, पटना भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कोशिश है कि नए पाठ्यक्रम को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद जल्द लागू किया जा सके। इससे आचार्य (स्नातकोत्तर) के विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होगा पाठ्यक्रम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लचीलापन, बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास और शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ने आचार्य पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव किए हैं।

नए पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ शोध क्षमता को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि संस्कृत शिक्षा को केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित न रखते हुए आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण से जोड़ा जाए।

संस्कृत शिक्षा में आएगा नया बदलाव

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय देश के प्रमुख संस्कृत विश्वविद्यालयों में शामिल है। यहां संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन और अन्य शास्त्रों के अध्ययन की समृद्ध परंपरा रही है। नए पाठ्यक्रम के लागू होने से विद्यार्थियों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे छात्रों को बेहतर अकादमिक अवसर मिलने के साथ-साथ शोध और रोजगार के क्षेत्र में भी लाभ मिलेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी की तैयारी

कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय के मार्गदर्शन में पाठ्यक्रम समिति ने काफी समय से इस दिशा में कार्य किया। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के सुझावों को शामिल करते हुए पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है।

अब सभी की नजरें 14 जुलाई को होने वाली विद्वत परिषद की बैठक पर टिकी हैं। परिषद की मंजूरी के बाद पाठ्यक्रम को आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। कुलाधिपति की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इसे विश्वविद्यालय में लागू किया जा सकेगा।

नया आचार्य पाठ्यक्रम संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, शोध और भविष्य के अवसरों से जोड़ने में सहायक होगा।

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