बिहार
बिहार में बाढ़ से राहत की तैयारी, गाद प्रबंधन नीति से बदलेगी तस्वीर
Rajeshwari Nishad
7 Nov 2026 2:26 PM IST

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पटना। बिहार सरकार ने नदियों में जमा होने वाली गाद के बेहतर प्रबंधन और उसके उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य की गाद प्रबंधन नीति 2026 के तहत नदियों से निकलने वाली गाद का इस्तेमाल अब हाईवे, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जा सकेगा। इस नीति का उद्देश्य नदियों की जलधारण क्षमता को बेहतर बनाना, बाढ़ के जोखिम को कम करने में मदद करना और गाद को उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करना है। सरकार की इस पहल से जल संरक्षण, कृषि और निर्माण क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार में हर साल मानसून के दौरान नदियों में बड़ी मात्रा में गाद जमा होती है। खासकर गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और अन्य नदियों में तलछट जमा होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई स्थानों पर नदी तल में गाद जमा होने से जल प्रवाह प्रभावित होता है। ऐसे में गाद का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नदियों की गाद अब बनेगी उपयोगी संसाधन
गाद प्रबंधन नीति 2026 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नदियों से निकलने वाली गाद को केवल अनुपयोगी सामग्री मानने के बजाय उसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में करने की योजना है। सड़क निर्माण, हाईवे परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यों में उपयुक्त गाद का उपयोग किया जा सकेगा।सामान्य तौर पर सड़क निर्माण और जमीन समतलीकरण के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी तथा अन्य सामग्री की आवश्यकता होती है। यदि नदी से निकली गाद तकनीकी मानकों के अनुरूप पाई जाती है, तो उसका उपयोग इन कार्यों में किया जा सकता है।इससे निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। हालांकि, गाद की गुणवत्ता, उसमें मौजूद नमी और उसकी संरचना का परीक्षण करना जरूरी होगा। हर प्रकार की गाद सड़क या हाईवे निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं होती।
बाढ़ नियंत्रण में मिल सकती है मदद
बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या गंभीर चुनौती बन जाती है। उत्तर बिहार की कई नदियों में हर साल जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होता है।नदियों में अत्यधिक गाद जमा होने से कुछ स्थानों पर जल प्रवाह की स्थिति प्रभावित हो सकती है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर चिन्हित क्षेत्रों में गाद हटाने से नदी की जलधारण और जल प्रवाह क्षमता में सुधार की संभावना रहती है।हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, केवल गाद हटाने से बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। बाढ़ नियंत्रण के लिए नदी के पूरे जलग्रहण क्षेत्र, वर्षा की मात्रा, तटबंधों की स्थिति और जल निकासी व्यवस्था को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से बाढ़ प्रबंधन की योजनाओं को अतिरिक्त सहयोग मिलने की उम्मीद है।
जल भंडारण क्षमता में सुधार की संभावना
नदियों और जलाशयों में गाद जमा होने से उनकी प्रभावी जल भंडारण क्षमता कम हो सकती है। विशेष रूप से जलाशयों में लंबे समय तक तलछट जमा होने पर पानी संग्रहित करने की उपलब्ध जगह घटने लगती है।ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने और उसका उचित उपयोग करने से जल भंडारण क्षमता में सुधार किया जा सकता है। इसका लाभ सिंचाई और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को मिल सकता है।बिहार में कृषि क्षेत्र की बड़ी आबादी सिंचाई के लिए नदियों, नहरों और भूजल पर निर्भर है। जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।नई नीति के तहत यदि गाद प्रबंधन को जल संरक्षण योजनाओं के साथ जोड़ा जाता है, तो इससे दीर्घकालिक जल प्रबंधन को मजबूती मिल सकती है।
किसानों को भी मिल सकता है लाभ
बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के कई जिलों में खेती के लिए नदियों और नहरों से मिलने वाला पानी जरूरी होता है। ऐसे में जल प्रवाह और सिंचाई व्यवस्था में सुधार का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच सकता है।नदियों से निकलने वाली कुछ प्रकार की गाद में उपयोगी खनिज और पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। उचित परीक्षण के बाद ऐसी गाद का कृषि भूमि में इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।हालांकि, सभी प्रकार की गाद खेती के लिए लाभकारी नहीं होती। कुछ स्थानों की तलछट में हानिकारक पदार्थ या प्रदूषक मौजूद हो सकते हैं। इसलिए कृषि में उपयोग से पहले वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक होगा।यदि नीति के तहत कृषि उपयोग के लिए उपयुक्त गाद की पहचान की जाती है, तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की संभावनाएं बन सकती हैं।
भूजल स्तर सुधारने में भी हो सकती है मदद
बिहार के कई क्षेत्रों में भूजल का इस्तेमाल पेयजल और सिंचाई के लिए किया जाता है। ऐसे में भूजल स्तर बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।नदियों और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से कुछ क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को मदद मिल सकती है। हालांकि, गाद हटाने का भूजल पर प्रभाव स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों और नदी तथा भूमिगत जल के आपसी संबंधों पर निर्भर करेगा।जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, तालाबों का संरक्षण और जल निकासी व्यवस्था में सुधार जैसे उपाय भी आवश्यक हैं।नई गाद प्रबंधन नीति को यदि व्यापक जल संरक्षण रणनीति के साथ लागू किया जाता है, तो इससे राज्य के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को फायदा
बिहार में सड़क और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की आवश्यकता रहती है। नदी से निकाली गई उपयुक्त गाद का उपयोग सड़क निर्माण में भराव सामग्री और भूमि समतलीकरण जैसे कार्यों में किया जा सकता है।इससे कुछ परियोजनाओं में पारंपरिक निर्माण सामग्री पर निर्भरता कम करने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक लाभ परिवहन दूरी, गाद की गुणवत्ता, प्रसंस्करण लागत और तकनीकी आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।निर्माण कार्यों में गाद का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित इंजीनियरिंग मानकों का पालन करना जरूरी होगा, ताकि सड़कों की मजबूती और सुरक्षा प्रभावित न हो।
पर्यावरण संरक्षण पर भी देना होगा ध्यान
नदियों से गाद निकालने की प्रक्रिया में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। बिना वैज्ञानिक अध्ययन के बड़े पैमाने पर गाद निकालने से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलीय जीवों और नदी किनारे की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।इसलिए गाद प्रबंधन की योजनाओं में पर्यावरणीय आकलन, तकनीकी निगरानी और आवश्यक अनुमतियों को प्राथमिकता देनी होगी।नदी के किन क्षेत्रों से कितनी गाद निकाली जाए, इसका निर्धारण वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर होना चाहिए।
बिहार के विकास में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है नीति
गाद प्रबंधन नीति 2026 को बिहार में जल संसाधन और बुनियादी ढांचा विकास को जोड़ने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसके जरिए नदियों में जमा गाद को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदलने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से बाढ़ प्रबंधन, जल भंडारण, कृषि और सड़क निर्माण जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन लाभों का वास्तविक आकलन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वैज्ञानिक निगरानी के बाद ही किया जा सकेगा।कुल मिलाकर, बिहार की नई गाद प्रबंधन नीति नदियों के बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस नीति को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है और इससे आम लोगों तथा किसानों को कितना लाभ मिलता है।
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