
पटना : बिहार की राजधानी पटना की हाई प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। सोमवार को पटना के एएन कॉलेज परिसर में जारी वोटों की गिनती में जन सुराज पार्टी के संयोजक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने मजबूत बढ़त बना ली है। शुरुआती रुझानों से लेकर 26वें राउंड तक प्रशांत किशोर लगातार आगे बने हुए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 26वें राउंड की गिनती पूरी होने तक प्रशांत किशोर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा से 15,864 वोटों से आगे चल रहे हैं।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा था। भाजपा, जन सुराज और राष्ट्रीय जनता दल के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मतगणना के रुझानों में अब मुकाबला मुख्य रूप से जन सुराज और भाजपा के बीच सिमटता नजर आ रहा है। राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी शुरुआत से ही पीछे चल रही हैं। 26वें राउंड तक रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं और वह करीब 41,633 वोटों से पिछड़ गई हैं।
प्रशांत किशोर की बढ़त कायम रहने के बाद जन सुराज पार्टी के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। बड़ी संख्या में समर्थक कार्यालय पहुंचे और जश्न मनाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ता एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर जीत की बधाई देते नजर आए। कार्यालय में जमकर नारेबाजी भी हुई। हालांकि अंतिम परिणाम सभी 31 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद ही घोषित किया जाएगा।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान कराया गया था। इस सीट पर कुल 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। कम मतदान प्रतिशत के बावजूद इस सीट के चुनावी परिणाम पर पूरे बिहार की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की गई। इसके बाद सुबह करीब 8:30 बजे से ईवीएम के वोटों की गणना शुरू हुई। चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए 16 टेबल बनाए हैं। प्रत्येक टेबल पर तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई है। ईवीएम के वोटों की गिनती कुल 31 राउंड में पूरी होनी है।
इस उपचुनाव में भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, जबकि जन सुराज पार्टी की ओर से खुद प्रशांत किशोर मैदान में उतरे। वहीं राजद ने रेखा कुमारी को चुनावी मैदान में उतारा। इस सीट से कुल 25 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है।
बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इससे पहले यह सीट वर्ष 1995 से भाजपा के कब्जे में रही है। लंबे समय से भाजपा के मजबूत किले के रूप में पहचानी जाने वाली इस सीट पर अगर प्रशांत किशोर की जीत होती है तो इसे बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
प्रशांत किशोर इससे पहले चुनावी रणनीतिकार के तौर पर देश की राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने जन सुराज अभियान के जरिए बिहार में नई राजनीतिक ताकत खड़ी करने का दावा किया था। बांकीपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट पर उनकी बढ़त पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है।
भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा था, क्योंकि यह सीट लंबे समय से पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल रही है। वहीं, जन सुराज के लिए यह चुनाव खुद को बिहार की राजनीति में एक विकल्प के रूप में स्थापित करने का बड़ा मौका है।
अब सभी की नजर अंतिम परिणाम पर टिकी हुई है। अगर शुरुआती रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं तो प्रशांत किशोर की जीत बिहार की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है और आने वाले चुनावों में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।





