
मधुबनी। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने मधुबनी जेल में रौशन यादव नाम के युवक की मौत का मामला उठाते हुए निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। शनिवार देर शाम मधुबनी पहुंचे प्रशांत किशोर ने एसएसपी योगेंद्र कुमार से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की। मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने दावा किया कि एसएसपी ने उन्हें 10 दिनों के भीतर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो वह दोबारा मधुबनी आएंगे और जरूरत पड़ने पर बिहार के डीजीपी तथा मुख्य सचिव से भी मुलाकात करेंगे।
रौशन यादव की 10 अगस्त को मधुबनी जेल में मौत हो गई थी। पुलिस की ओर से इसे आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है, जबकि रौशन के परिजन इस दावे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। परिवार का आरोप है कि रौशन की हत्या की गई है। पुलिस और परिजनों के अलग-अलग दावों के कारण मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब प्रशांत किशोर के इस मुद्दे को उठाने के बाद मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है।
शनिवार देर शाम मधुबनी पहुंचे प्रशांत किशोर ने सबसे पहले मामले से जुड़ी जानकारी ली और इसके बाद एसएसपी योगेंद्र कुमार से मुलाकात की। उन्होंने जेल में हुई रौशन यादव की मौत से जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाए और कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एसएसपी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारी से इस मामले में विस्तार से चर्चा हुई है। उनके मुताबिक एसएसपी ने 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। प्रशांत किशोर ने साफ किया कि वह मामले पर नजर बनाए रखेंगे और यदि तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो दोबारा मधुबनी पहुंचेंगे।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भी उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर परिवार को न्याय नहीं मिलता है तो वह बिहार के पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच पारदर्शी तरीके से करने और पीड़ित परिवार की आशंकाओं को दूर करने की मांग की।
रौशन यादव की जेल में मौत के बाद से उसके परिवार के लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि रौशन ने आत्महत्या की थी, लेकिन परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है। परिजन चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि जेल के अंदर रौशन के साथ आखिर क्या हुआ था।
किसी भी बंदी की जेल में मौत होने की स्थिति में कई तरह की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे मामलों में मौत के कारणों की जांच के साथ जेल प्रशासन की भूमिका और घटनाक्रम की परिस्थितियों की भी पड़ताल की जाती है। रौशन यादव की मौत के मामले में भी जांच के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि पुलिस और परिवार की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
प्रशांत किशोर ने इसी अंतर को देखते हुए निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है। उनका कहना है कि जांच ऐसी होनी चाहिए जिससे पीड़ित परिवार को संतुष्टि मिले और किसी तरह का संदेह बाकी न रहे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जन सुराज इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर के अधिकारियों के सामने मामला उठाया जाएगा।
रौशन यादव की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर भी घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है। जेल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर किसी बंदी की मौत होने के बाद स्वाभाविक रूप से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से जुड़े सवाल उठते हैं। परिजनों द्वारा हत्या का आरोप लगाए जाने के कारण मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले मौत के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
जन सुराज से जुड़े प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं। कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, पलायन और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे विषयों पर वह लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। अब मधुबनी जेल में रौशन यादव की मौत के मामले को उठाकर उन्होंने प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है।
प्रशांत किशोर की एसएसपी योगेंद्र कुमार के साथ हुई मुलाकात के बाद अब सभी की नजर अगले 10 दिनों में होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। एसएसपी की ओर से जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार को भी मामले में आगे की प्रगति का इंतजार है। वहीं प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्हें जांच या कार्रवाई में संतोषजनक प्रगति दिखाई नहीं देती है तो वह एक बार फिर मधुबनी पहुंचकर मामले को उठाएंगे।
इसके साथ ही उन्होंने डीजीपी और मुख्य सचिव तक मामला ले जाने की बात कही है। ऐसे में रौशन यादव की मौत का मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और रौशन यादव की मौत को लेकर पुलिस तथा परिजनों के परस्पर विरोधी दावों के बीच वास्तविक घटनाक्रम क्या था।





