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पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया में व्यापक सुधार करने की आवश्यकता बताई। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले सात-आठ वर्षों के दौरान चुनाव आयोग के कामकाज में सत्ताधारी दल के प्रति झुकाव दिखाई दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता दांव पर है और इसके लिए किसी एक व्यक्ति या घटना को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है। इसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों का भरोसा चुनाव आयोग से उठने लगता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार, मौजूदा विवाद को केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि आयोग की संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव की आवश्यकता है।पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा, "चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता दांव पर है, और ऐसा किसी एक व्यक्ति या किसी एक घटना की वजह से नहीं हुआ है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में चुनाव आयोग के फैसलों और उसकी कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। प्रशांत किशोर के मुताबिक, इन विवादों के कारण आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाने के लिए संस्थागत सुधारों पर जोर दिया।जन सुराज के संस्थापक ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक व्यक्ति के पद छोड़ने से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया सहित उसकी कार्यप्रणाली में बदलाव किए जाने चाहिए।
प्रशांत किशोर इससे पहले भी चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की तारीखें तय करने और आदर्श आचार संहिता लागू करने की प्रक्रिया को लेकर आयोग पर सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अधिक पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, ये उनके आरोप हैं और इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर आपत्ति जता रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग की है।
वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों में कथित पक्षपात और अनियमितताओं के आरोपों का खंडन किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य उसे अद्यतन करना और नियमों के अनुसार प्रविष्टियों का सत्यापन करना है। भारतीय जनता पार्टी ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।चुनाव आयोग में सुधार की प्रशांत किशोर की मांग के बीच चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश का प्रावधान है। इस समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
इस व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस चल रही है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में किस प्रकार के बदलाव किए जाने चाहिए, यह चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। न्यायालय में यह मामला कानूनी परीक्षण का विषय है और याचिका दाखिल होना अपने आप में किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं करता।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके अनुसार, आयोग को ऐसी संस्था के रूप में काम करना चाहिए, जिस पर सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का भरोसा बना रहे।जन सुराज के संस्थापक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ चुनाव आयोग की संस्थागत व्यवस्था में बदलाव को आवश्यक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की मौजूदा स्थिति पिछले कई वर्षों की कार्यप्रणाली का परिणाम है। उनका कहना था कि केवल नेतृत्व परिवर्तन करने के बजाय उन कारणों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जिनके कारण संस्था की साख पर सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित कानूनी सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े प्रावधानों पर न्यायिक समीक्षा की मांग सामने आई है। इससे चुनाव आयोग की संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को नया संदर्भ मिला है।गुरुवार को प्रशांत किशोर ने दोहराया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए व्यापक सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि समस्या किसी एक व्यक्ति या एक घटना तक सीमित नहीं है।उनके बयान का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग में संस्थागत सुधार, नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और चुनावी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता रहा। विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशांत किशोर की इस टिप्पणी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी जवाबदेही को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में एक और पक्ष जोड़ा है।
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