
पाटन। गुजरात में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब के निर्माण और तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। पाटन जिले में पुलिस की 54 विशेष टीमों ने एक साथ 260 स्थानों पर छापेमारी कर अवैध शराब बनाने और बेचने वालों पर कार्रवाई की। पुलिस ने अभियान के दौरान 110 मामले दर्ज किए और बड़ी मात्रा में देशी-विदेशी शराब जब्त की। जिला पुलिस अधीक्षक वी.के. नायी के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई से अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस की कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध दो विवरणों में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। प्रारंभिक सूचना में 16 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख है, जबकि 26 अक्टूबर को प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट में 21 आरोपियों को पकड़े जाने और 16.68 लाख रुपये से अधिक मूल्य की शराब जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
54 पुलिस टीमों ने 260 स्थानों पर दी दबिश
पाटन जिला पुलिस ने अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। इसके लिए स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी), स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और विभिन्न पुलिस थानों के कर्मचारियों को मिलाकर कुल 54 टीमें गठित की गईं।
बनासकांठा रेंज की पुलिस महानिरीक्षक परीक्षिता राठौड़ और पाटन के पुलिस अधीक्षक वी.के. नायी के निर्देश पर टीमों ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की।
अभियान का उद्देश्य शराब के अवैध निर्माण, भंडारण और बिक्री से जुड़े ठिकानों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई करना था।
पुलिस ने कुल 260 स्थानों पर छापेमारी की। विभिन्न जगहों से देशी और विदेशी शराब बरामद की गई तथा संबंधित लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
110 मामले दर्ज, लाखों रुपये की शराब जब्त
पुलिस की इस कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज होना है।
अभियान के दौरान शराबबंदी कानून के उल्लंघन से संबंधित कुल 110 मामले दर्ज किए गए।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने करीब 16 लाख 68 हजार 885 रुपये मूल्य की देशी और विदेशी शराब जब्त की।
कार्रवाई में कई आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी रह सकती है।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि अलग-अलग स्थानों पर अवैध शराब की आपूर्ति किन लोगों के माध्यम से की जा रही थी और क्या इन मामलों के बीच कोई संबंध है।
शंखेश्वर में लग्जरी बस की तलाशी से खुलासा
जिले के शंखेश्वर क्षेत्र में भी अवैध शराब की तस्करी का मामला सामने आया है।
यहां पुलिस ने शंखेश्वर-दसाड़ा हाईवे पर नाकाबंदी के दौरान एक लग्जरी बस की तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, बस में सामान्य यात्रियों की जगह शराब की अवैध खेप ले जाई जा रही थी।
तलाशी में पुलिस को बस के विशेष रूप से बनाए गए गुप्त हिस्से में छिपाई गई शराब मिली।
यह बरामदगी दर्शाती है कि अवैध शराब के परिवहन के लिए यात्री वाहनों का भी इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं।
पुलिस इस मामले में बस के संचालन, शराब की आपूर्ति और उसे प्राप्त करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बस के गुप्त केबिन से मिलीं 6,108 बोतलें
26 अक्टूबर की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, शंखेश्वर-दसाड़ा हाईवे पर पकड़ी गई लग्जरी बस के गुप्त केबिन से विदेशी शराब और बीयर की कुल 6,108 बोतलें बरामद की गईं।
बरामद शराब की अनुमानित कीमत 12.12 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने बस, मोबाइल फोन और शराब सहित लगभग 22.17 लाख रुपये का सामान जब्त किया।
इस कार्रवाई के दौरान बस चालक को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसका एक साथी कथित तौर पर मौके से फरार हो गया।
प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार, शराब की खेप राजस्थान के जोधपुर से लोड की गई थी और इसे गुजरात के गांधीधाम पहुंचाया जाना था। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू की है।
राजस्थान से गुजरात तक फैले नेटवर्क की जांच
लग्जरी बस से शराब की बड़ी खेप बरामद होने के बाद पुलिस की जांच अंतरराज्यीय आपूर्ति नेटवर्क की ओर भी बढ़ी है।
गुजरात में शराबबंदी के कारण अवैध रूप से शराब पहुंचाने वाले लोग विभिन्न परिवहन साधनों का इस्तेमाल करते हैं। बसों और अन्य वाहनों में शराब छिपाकर ले जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।
शंखेश्वर में पकड़ी गई बस के मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की खरीद और परिवहन में किन लोगों की भूमिका थी।
इसके अलावा गांधीधाम में खेप प्राप्त करने वाले व्यक्ति और आगे इसकी संभावित बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
हालांकि, जिलेभर में हुई 260 स्थानों की छापेमारी और शंखेश्वर की बस बरामदगी को एक ही आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बताने की पुष्टि नहीं हुई है।
गुजरात में शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार चुनौती
गुजरात में शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। राज्य में शराब संबंधी गतिविधियां गुजरात मद्यनिषेध कानून और उसके तहत निर्धारित अनुमति व्यवस्था से नियंत्रित होती हैं।
इसके बावजूद अवैध शराब के निर्माण और परिवहन से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं।
अवैध देशी शराब का कारोबार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। असुरक्षित तरीके से तैयार शराब में जहरीले पदार्थ होने का जोखिम रहता है, जिससे गंभीर बीमारी और मृत्यु तक हो सकती है।
इसी वजह से अवैध शराब निर्माण पर कार्रवाई के साथ संदिग्ध शराब की गुणवत्ता और उसके स्रोत की जांच भी महत्वपूर्ण होती है।
पहले ड्रोन की मदद से भी पकड़ी गई थी भट्ठी
पाटन जिले में पुलिस पहले भी तकनीक की सहायता से अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
23 अगस्त 2026 को शंखेश्वर के मनवरपुरा गांव के आसपास एलसीबी और स्थानीय पुलिस ने ड्रोन की मदद से अवैध देशी शराब बनाने की भट्ठी का पता लगाया था।
उस कार्रवाई में करीब 90 लीटर देशी शराब और शराब बनाने से संबंधित सामग्री जब्त की गई थी। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार करने की जानकारी भी दी थी।
यह पुरानी कार्रवाई दिखाती है कि पुलिस अलग-अलग तरीकों से संदिग्ध निर्माण स्थलों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
पुलिस के सामने अब तस्करी नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
पाटन जिले में 54 टीमों द्वारा चलाए गए अभियान में 260 स्थानों पर छापेमारी और 110 मामले दर्ज होना व्यापक पुलिस कार्रवाई का संकेत है।
हालांकि, अवैध शराब के कारोबार पर स्थायी नियंत्रण के लिए केवल शराब की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होगी।
पुलिस को निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करनी होगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि अवैध शराब की आपूर्ति किन मार्गों से हो रही थी।
फिलहाल पाटन पुलिस की कार्रवाई के बाद कई मामले जांच के अधीन हैं। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से आरोपियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।





