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बिहार में पीएम सूर्य घर योजना लक्ष्य से पीछे

Kavita2
24 Aug 2026 9:28 AM IST
बिहार में पीएम सूर्य घर योजना लक्ष्य से पीछे
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पटना। बिहार में गरीब परिवारों को सौर ऊर्जा के जरिए बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में चलाई जा रही पीएम सूर्य घर योजना फिलहाल निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। राज्य में नवंबर तक 2.50 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर 1.1 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन अब तक करीब 49 हजार घरों में ही सोलर प्लांट लगाए जा सके हैं। ऐसे में निर्धारित समय में लक्ष्य हासिल करना संबंधित विभाग और एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2.50 लाख परिवारों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 49 हजार परिवारों के घरों में सोलर प्लांट लगाए गए हैं। इसका मतलब है कि करीब 2 लाख 1 हजार घर अभी भी लक्ष्य से बाकी हैं। योजना का निर्धारित लक्ष्य नवंबर तक पूरा किया जाना है और इसके लिए लगभग 100 दिनों का समय शेष बताया जा रहा है। ऐसे में अब काम की रफ्तार कई गुना बढ़ानी होगी।

यदि बाकी बचे 2.01 लाख घरों में अगले 100 दिनों में सोलर प्लांट लगाने हैं तो औसतन प्रतिदिन लगभग दो हजार घरों में स्थापना करनी होगी। यह आंकड़ा मौजूदा रफ्तार की तुलना में काफी बड़ा है। इसके लिए जिला स्तर पर लाभार्थियों की पहचान, तकनीकी सर्वेक्षण, उपकरणों की उपलब्धता और सोलर प्लांट की स्थापना तक पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना होगा।

योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों के बिजली खर्च को कम करने के साथ उन्हें स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ना है। घरों की छतों पर लगाए जाने वाले 1.1 किलोवाट के सोलर प्लांट के जरिए परिवार अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा स्वयं पैदा कर सकेंगे। इससे परंपरागत बिजली व्यवस्था पर उनकी निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

बिहार जैसे राज्य में जहां ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है, वहां रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए योजना को बड़े पैमाने पर जमीन पर उतारना जरूरी है। अब तक 49 हजार घरों में प्लांट लगाए जाने के बाद भी कुल लक्ष्य का बड़ा हिस्सा बाकी है।

आने वाले 100 दिन इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रतिदिन दो हजार से अधिक घरों में सोलर प्लांट लगाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों, इंस्टॉलेशन टीमों और उपकरणों की जरूरत होगी। यदि किसी स्तर पर सामग्री की आपूर्ति या लाभार्थियों के सत्यापन में देरी होती है तो लक्ष्य हासिल करना और मुश्किल हो सकता है।

इसके अलावा अलग-अलग जिलों की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौती बन सकती हैं। शहरी क्षेत्रों में घरों तक पहुंच और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता अपेक्षाकृत आसान हो सकती है, जबकि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पैनल और अन्य उपकरण पहुंचाने के साथ स्थापना के लिए प्रशिक्षित टीम भेजने में अधिक समय लग सकता है।

लक्ष्य हासिल करने के लिए जिला प्रशासन और योजना से जुड़ी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। लाभार्थियों की सूची तैयार करने से लेकर उनके घर की छत का निरीक्षण, सोलर पैनल की आपूर्ति और प्लांट चालू करने तक कई चरण पूरे करने होते हैं। इन सभी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।

पीएम सूर्य घर योजना के जरिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के स्तर पर भी होगा। अधिक संख्या में घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगने से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा। इससे बिजली की मांग के एक हिस्से को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा और परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

गरीब परिवारों के लिए योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बिजली खर्च में संभावित कमी है। सोलर प्लांट से घर में बिजली उत्पादन होने पर परिवारों को लंबे समय में आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसी वजह से राज्य में 2.50 लाख गरीब परिवारों को शुरुआती लक्ष्य में शामिल किया गया है।

हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नवंबर तक शेष 2.01 लाख घरों में प्लांट लगाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इसके लिए प्रतिदिन लगभग दो हजार घरों में काम पूरा करना होगा। सप्ताह और महीने के हिसाब से देखें तो इंस्टॉलेशन की गति में काफी तेजी लानी पड़ेगी।

योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए लाभार्थियों को जागरूक करना भी महत्वपूर्ण होगा। जिन परिवारों का चयन किया गया है, उन्हें योजना की प्रक्रिया, सोलर प्लांट के फायदे और स्थापना से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी। इससे तकनीकी टीम के पहुंचने पर प्रक्रिया को जल्दी पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सोलर प्लांट लग जाने के बाद उसकी गुणवत्ता और रखरखाव भी अहम होगा। केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए तेजी से इंस्टॉलेशन करने के बजाय यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि लगाए गए सोलर सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और लाभार्थियों को उनका पूरा लाभ मिले।

फिलहाल बिहार में पीएम सूर्य घर योजना के आंकड़े सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। 2.50 लाख के लक्ष्य में से करीब 49 हजार घरों तक योजना पहुंच चुकी है, जबकि 2.01 लाख घर अभी बाकी हैं। अब अगले करीब 100 दिनों में योजना की रफ्तार तय करेगी कि नवंबर तक लक्ष्य हासिल हो पाता है या नहीं।

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