
पटना : बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने अगले पांच वर्षों में 50 लाख युवाओं का कौशल विकास करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत युवाओं को उद्योगों और बाजार की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षित किया जाएगा।
सरकार की योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए पूरी तरह सक्षम बनाना है। इसके लिए राज्य के 16 सरकारी विभाग अलग-अलग क्षेत्रों और ट्रेड में युवाओं को प्रशिक्षण देंगे। सरकार इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए निजी क्षेत्र की बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों का सहयोग भी लेगी, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक तकनीक और उद्योग की मांग के अनुरूप बदलाव किए जा सकें।
इस योजना का खाका हाल ही में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बिहार कौशल विकास मिशन के शासी पर्षद की 21वीं बैठक में तैयार किया गया। बैठक में राज्य में कौशल प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर पहुंचाने, रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने और युवाओं की क्षमता बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वर्षवार योजना बनाई है। इसी के आधार पर अलग-अलग वर्षों में युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और अधिक से अधिक युवाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकेगा।
योजना के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में चार लाख 65 हजार 740 युवाओं का कौशल विकास करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद आने वाले वर्षों में प्रशिक्षण की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा, ताकि पांच साल में कुल 50 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
सरकार का विशेष जोर उन क्षेत्रों पर रहेगा, जहां रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं। इसके तहत आईटी, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण क्षेत्र, कृषि आधारित उद्योग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और अन्य उभरते उद्योगों से जुड़े कौशल विकसित किए जाएंगे। युवाओं को स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा समय में केवल डिग्री या शैक्षणिक योग्यता रोजगार के लिए पर्याप्त नहीं है। उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी कौशल हो। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की जरूरत से जोड़ने की रणनीति बना रही है।
इस अभियान में निजी कंपनियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बने, जिससे युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर मिल सकें। कंपनियों की मदद से पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
बिहार कौशल विकास मिशन पहले से ही राज्य में युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने का काम कर रहा है। नई योजना के तहत इसके दायरे को और व्यापक बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक भी कौशल प्रशिक्षण की सुविधाएं पहुंचाने की तैयारी है, ताकि गांवों के प्रतिभाशाली युवाओं को भी रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े युवा आबादी वाले राज्य में कौशल विकास रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। यदि प्रशिक्षण कार्यक्रम बाजार की मांग के अनुरूप संचालित किए जाते हैं तो युवाओं को राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
सरकार का यह भी प्रयास है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी तैयार किया जाए। इसके लिए उद्यमिता विकास, वित्तीय सहायता योजनाओं और बाजार से जुड़ाव पर भी ध्यान दिया जा सकता है। इससे युवा नौकरी तलाशने वाले के साथ-साथ रोजगार देने वाले भी बन सकेंगे।
योजना के तहत महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कौशल प्रशिक्षण का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और अधिक से अधिक युवा आत्मनिर्भर बन सकें।
बिहार सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कुशल मानव संसाधन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। 50 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने की यह योजना इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।
अब इस योजना के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर होगी। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों से तालमेल और युवाओं को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता ही इस अभियान की सफलता तय करेगी। यदि सरकार अपने लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यह पहल बिहार के युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर खोल सकती है।





