
पटना। बिहार की राजधानी पटना से साइबर अपराधियों और जालसाजों के दुस्साहस की एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक प्रतिष्ठित प्लास्टिक व्यवसायी को बाजार दर से काफी कम कीमत पर थोक में कच्चा माल (प्लास्टिक दाना) उपलब्ध कराने का लालच देकर शातिरों ने 3 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि की ठगी कर ली। इस बड़ी वारदात के बाद पीड़ित व्यवसायी की लिखित शिकायत पर पटना साइबर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ठगों के इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए तकनीकी अनुसंधान तेज कर दिया है।
खाजेकलां के कारोबारी को बनाया निशाना
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला पटना के खाजेकलां इलाके का है। यहाँ के निवासी धीरज कुमार 'धीरज प्लास्टिक वर्क्स' नाम से अपनी एक रजिस्टर्ड फैक्ट्री चलाते हैं, जो रानीपुर में स्थित है। उनकी कंपनी मुख्य रूप से प्लास्टिक कचरे को रीसायकल (पुनर्चक्रण) करके प्लास्टिक दाना तैयार करने का काम करती है। कुछ समय पहले उनकी फैक्ट्री के कार्यालय में संजय पॉल नाम का एक अज्ञात व्यक्ति पहुँचा। उसने खुद को प्लास्टिक दाने के कच्चे माल का एक बहुत बड़ा और प्रतिष्ठित ब्रोकर (दलाल) बताया। संजय ने धीरज को बाजार भाव से बेहद सस्ते रेट पर थोक में कच्चा माल डिलीवर करने का एक आकर्षक और लुभावना प्रस्ताव दिया।
दो फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कराए करोड़ों रुपये
सस्ते माल और अधिक मुनाफे के झांसे में आकर कारोबारी धीरज ने संजय पॉल को भारी मात्रा में कच्चा माल सप्लाई करने का एक बड़ा ऑर्डर दे दिया। ऑर्डर फाइनल होते ही आरोपी ब्रोकर ने माल भेजने और एडवांस पेमेंट के नाम पर ‘बालाजी ट्रेडर्स’ और ‘ट्रिनिटी ब्रॉडवे कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक दो कंपनियों के बैंक खातों की डिटेल्स कारोबारी को सौंप दीं। व्यापारिक भरोसा करते हुए कारोबारी धीरज ने विभिन्न तारीखों में कई किश्तों में कुल 3,82,88,000 रुपये (तीन करोड़ बयासी लाख अठासी हजार) की भारी रकम उन दोनों बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी।
फर्जी जीएसटी बिल थमाया, फिर फोन कर लिया बंद
करोड़ों रुपये ऐंठने के बाद शातिर संजय पॉल ने कारोबारी का भरोसा जीतने के लिए उन्हें एक बकायदा जीएसटी (GST) बिल भी थमा दिया। इस बिल को देखकर पीड़ित व्यवसायी पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि उनका माल जल्द ही फैक्ट्री पहुँचने वाला है। लेकिन इस प्रक्रिया के कुछ ही दिनों बाद अचानक आरोपी संजय पॉल का मोबाइल नंबर बंद हो गया और उससे हर प्रकार का संपर्क पूरी तरह टूट गया। जब काफी दिनों तक माल की डिलीवरी नहीं हुई और ब्रोकर का फोन भी लगातार बंद आने लगा, तो धीरज को किसी बड़ी अनहोनी की आशंका हुई।
केवल ठगी के लिए बनाई गई थीं शेल कंपनियां
पीड़ित कारोबारी धीरज ने जब अपने स्तर से उन दोनों कंपनियों के बारे में गहराई से छानबीन शुरू की, तो उनके होश उड़ गए। जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि ‘बालाजी ट्रेडर्स’ और ‘ट्रिनिटी ब्रॉडवे कंस्ट्रक्शन’ जैसी कंपनियां धरातल पर थीं ही नहीं। जालसाजों ने केवल लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने और काले धन को इधर-उधर करने के उद्देश्य से इन शेल (फर्जी) कंपनियों का निर्माण किया था। वे एक बेहद संगठित रूप से साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहे हैं, जिसमें संजय पॉल मुख्य मोहरे और ब्रोकर की भूमिका निभा रहा था।खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस करने के बाद पीड़ित व्यवसायी ने तुरंत मामले की लिखित शिकायत पटना साइबर थाने को दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अज्ञात जालसाजों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और कॉल डिटेल्स व बैंक स्टेटमेंट के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि व्यापारिक लेन-देन में बिना पूरी पड़ताल के किया गया अंधा भरोसा कितना आत्मघाती हो सकता है।





