बिहार

रैयाम सकरी में नई चीनी मिलों का रास्ता साफ हजारों किसान उत्साहित

nidhi
2 Sept 2026 12:24 PM IST
रैयाम सकरी में नई चीनी मिलों का रास्ता साफ हजारों किसान उत्साहित
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चीनी मिल परियोजना को लेकर किसानों में बढ़ी उम्मीद
पटना: बिहार में चीनी उद्योग को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इन दोनों परियोजनाओं पर करीब 852 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। सरकार का दावा है कि इससे गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रैयाम और सकरी में प्रस्तावित चीनी मिलों को बिहार के गन्ना उद्योग के पुनरुद्धार की बड़ी योजना का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के साथ नई मिलें स्थापित करने पर भी जोर दे रही है। राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना है।
27,980 किसानों ने दिखाई रुचि
नई मिलों के आसपास गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27,980 किसानों ने गन्ना उत्पादन में रुचि दिखाई है। सरकार का प्रयास है कि नई मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों पर निर्भर न रहना पड़े। गन्ना किसानों के लिए कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। इनमें गन्ना बीज विकास, कृषि यंत्रीकरण, गन्ना नर्सरी और नई चीनी मिलों के क्षेत्रों में गन्ना विस्तार जैसी योजनाएं शामिल हैं। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है।
चीनी के साथ एथेनॉल और बिजली भी
सरकार नई चीनी मिलों को सिर्फ चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। प्रस्तावित मिलों को शुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की योजना है। इनमें चीनी के साथ एथेनॉल, बिजली और बायोगैस के उत्पादन की व्यवस्था की जा सकती है। इससे मिलों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार होंगे और गन्ने से जुड़े उद्योगों का दायरा बढ़ेगा। बिहार सरकार ने गन्ना आधारित उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि नई नीति से निवेशकों की रुचि बढ़ेगी और राज्य में चीनी उद्योग से जुड़े नए प्रोजेक्ट आ सकते हैं।
किसानों और युवाओं को फायदा
नई चीनी मिलों का सबसे बड़ा फायदा गन्ना किसानों और स्थानीय युवाओं को मिलने की उम्मीद है। मिल शुरू होने के बाद किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए बेहतर स्थानीय बाजार मिल सकता है। वहीं मिलों के संचालन, परिवहन, कृषि सेवाओं और सहायक कारोबारों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है। सासामुसा चीनी मिल से जुड़े गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा मढ़ौरा और मोतीपुर की बंद मिलों को लेकर भी सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं।
गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सरकार का फोकस केवल मिल बनाने पर नहीं बल्कि पर्याप्त गन्ना उत्पादन सुनिश्चित करने पर भी है। विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक और कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के साथ गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, पेराई सत्र 2025-26 में चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 2,137.83 करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान किया। इस वर्ष राज्य में गन्ने की रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर बताई गई है। रैयाम और सकरी की नई चीनी मिलें बिहार में गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही हैं। यदि परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो इससे किसानों की आय, स्थानीय रोजगार और राज्य के चीनी उद्योग को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।
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