
समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर ट्रेनों में यात्रियों को नकली सोना बेचकर ठगी करने वाले गिरोह का रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने पिता और उसके दो बेटों समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या नौ निवासी मोहम्मद यूनुस (55 वर्ष) और उसके दो पुत्रों मोहम्मद दाऊद (24 वर्ष) तथा मोहम्मद गुड्डू (25 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों वर्तमान में समस्तीपुर शहर के धर्मपुर इलाके में किराए के मकान में रहते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपित ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को असली सोना होने का भरोसा दिलाकर नकली धातु बेचते थे और उनसे रुपये ऐंठ लेते थे। तलाशी के दौरान आरोपितों के कब्जे से चोरी का एक मोबाइल फोन भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
रेलवे सुरक्षा बल ने किया गिरोह का खुलासा
समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर यात्रियों के साथ हो रही ठगी की शिकायतों के बीच आरपीएफ ने विशेष कार्रवाई की।
जांच में सामने आया कि कुछ लोग ट्रेनों में यात्रियों को कम कीमत पर सोना बेचने का लालच देकर धोखाधड़ी कर रहे थे।
इन लोगों का तरीका ऐसा था कि सामान्य यात्री आसानी से इनके झांसे में आ सकते थे।
मामले की जानकारी मिलने के बाद रेलवे सुरक्षा बल ने गिरोह की गतिविधियों का पता लगाना शुरू किया।
जांच के दौरान पिता और उसके दो बेटों की संलिप्तता सामने आने पर तीनों को गिरफ्तार किया गया।
पिता और दो बेटों की हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपितों में 55 वर्षीय मोहम्मद यूनुस और उसके दोनों बेटे शामिल हैं।
मोहम्मद यूनुस हसनपुर थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या नौ का निवासी है। उसके बेटे मोहम्मद दाऊद की उम्र 24 वर्ष और मोहम्मद गुड्डू की उम्र 25 वर्ष बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, तीनों समस्तीपुर शहर के धर्मपुर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहे थे।
आरोप है कि तीनों मिलकर यात्रियों को ठगने की गतिविधियों में शामिल थे।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को अपना शिकार बनाया और ठगी के जरिए कितनी रकम हासिल की।
नकली सोना बेचने का अपनाते थे अनोखा तरीका
आरपीएफ की जांच में आरोपितों के ठगी करने का तरीका भी सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य पीली धातु को सोने की तरह पेश करते थे।
वे इसे प्लास्टिक में लपेटकर रखते और ट्रेनों में यात्रियों के सामने कम कीमत पर बेचने का प्रस्ताव रखते थे।
यात्रियों को भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें बाजार मूल्य से काफी कम कीमत में सोना मिल रहा है।
इस दौरान गिरोह के दूसरे सदस्य सामान्य यात्री बनकर खरीदारी में रुचि दिखाते थे।
इस तरह आसपास बैठे यात्रियों को विश्वास दिलाने का प्रयास किया जाता था कि सोना असली है और उसे खरीदना फायदे का सौदा होगा।
नकली नोटों की गड्डी से करते थे दिखावा
जांच से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया है कि गिरोह के सदस्य नकली नोटों की गड्डी का भी इस्तेमाल करते थे।
गिरोह का एक सदस्य दूसरे सदस्य से कथित सोना खरीदने का नाटक करता था।
इसके बदले नकली नोटों की गड्डी देने का दिखावा किया जाता था।
इस गतिविधि को देखकर आसपास मौजूद यात्रियों को लगता था कि सोना वास्तव में कीमती है और उसे कम कीमत पर खरीदा जा सकता है।
इसके बाद गिरोह के सदस्य इच्छुक यात्रियों को नकली सोना बेचकर उनसे असली रुपये ले लेते थे।
हालांकि, इस मामले में कितने नकली नोट या कितनी मात्रा में पीली धातु बरामद हुई, इसका स्पष्ट आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
दरभंगा की महिला यात्री बनी थी शिकार
जानकारी के अनुसार, गिरोह के खिलाफ कार्रवाई में एक महिला यात्री की शिकायत महत्वपूर्ण रही।
दरभंगा की रहने वाली एक महिला ट्रेन में सफर के दौरान आरोपितों के झांसे में आ गई थी।
बताया गया कि महिला को कम कीमत पर सोना देने का भरोसा दिलाकर उससे रुपये ले लिए गए।
बाद में उसे ठगी होने की जानकारी मिली।
महिला ने मामले की लिखित शिकायत रेलवे सुरक्षा बल से की।
शिकायत मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपितों की पहचान के लिए जांच शुरू कराई।
आरपीएफ की विशेष टीम ने की कार्रवाई
महिला यात्री की शिकायत के बाद आरपीएफ के मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई।
इस टीम में आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश क्रोशिया, सब इंस्पेक्टर शशिकांत तिवारी और अन्य कर्मचारी शामिल थे।
रेलवे सुरक्षा बल की टीम ने संदिग्ध गतिविधियों की जांच करते हुए आरोपितों तक पहुंचने का प्रयास किया।
जांच के दौरान तीनों आरोपितों की पहचान होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई में रेलवे सुरक्षा बल और अपराध सूचना शाखा से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी रही।
चोरी का मोबाइल फोन भी मिला
तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को एक मोबाइल फोन भी मिला।
पुलिस के अनुसार, यह मोबाइल चोरी का बताया जा रहा है।
अब मोबाइल के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मोबाइल किस व्यक्ति का है और उसका आरोपितों तक पहुंचने का क्या कारण था।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि चोरी के मोबाइल का कथित ठगी की गतिविधियों से कोई संबंध है या नहीं।
फिलहाल मोबाइल की बरामदगी को लेकर यही जानकारी सामने आई है कि वह चोरी का बताया गया है।
जीआरपी थाने में दर्ज हुआ मामला
रेलवे सुरक्षा बल की कार्रवाई के बाद मामले को राजकीय रेल पुलिस यानी जीआरपी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जीआरपी थाना प्रभारी बीरबल कुमार ने गिरफ्तारी और मामले में कानूनी कार्रवाई की पुष्टि की है।
पुलिस के अनुसार, महिला यात्री की शिकायत और आरपीएफ की कार्रवाई के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
हालांकि, संबंधित मुकदमे में लगाई गई सभी कानूनी धाराओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
यात्रियों को लालच देकर बनाते थे निशाना
ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री अक्सर अलग-अलग स्थानों से आते हैं। यात्रा के दौरान अनजान व्यक्तियों से बातचीत भी होती है।
इसी स्थिति का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करने वाले लोग यात्रियों को कम कीमत पर कीमती सामान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दे सकते हैं।
समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड के इस मामले में आरोपितों ने कथित तौर पर नकली सोने को असली बताकर यात्रियों से रुपये हासिल किए।
ऐसी घटनाओं में यात्रियों को बिना बिल और प्रमाणपत्र के कीमती धातु खरीदने से बचना चाहिए।
अनजान व्यक्ति द्वारा अत्यधिक कम कीमत में सोना देने का प्रस्ताव धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
अन्य साथियों की भूमिका की जांच
तीन आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनके अन्य संभावित संपर्कों की जानकारी भी जुटा रही है।
जांच का एक महत्वपूर्ण विषय यह है कि गिरोह में केवल पिता और उसके दो बेटे शामिल थे या कुछ अन्य लोग भी उनसे जुड़े हुए थे।
इसके अलावा आरोपितों ने किन-किन ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाया और कितनी घटनाओं को अंजाम दिया, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
पुलिस उनके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जानकारी जुटा रही है।
किसी अन्य घटना में उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रेलवे यात्रियों से सतर्क रहने की अपील
ट्रेनों में सफर करते समय अनजान लोगों से सोना, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
यात्रियों को विशेष रूप से ऐसे प्रस्तावों से सतर्क रहना चाहिए, जिनमें बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर कीमती सामान देने का दावा किया जाता है।
रेल यात्रा के दौरान किसी संदिग्ध गतिविधि या धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर रेलवे सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत की जा सकती है।
इसके अलावा यात्री रेलवे सुरक्षा बल या जीआरपी से भी संपर्क कर सकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद जांच जारी
समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर नकली सोना बेचकर यात्रियों से ठगी करने के मामले में पिता और दो बेटों की गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद यूनुस और उसके दोनों बेटे ट्रेनों में यात्रियों को नकली सोना बेचकर धोखाधड़ी करने के आरोप में पकड़े गए हैं।
इनके पास से चोरी का मोबाइल भी बरामद होने की बात सामने आई है।
महिला यात्री की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में रेलवे सुरक्षा बल को यह सफलता मिली।
फिलहाल तीनों आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित लोगों, ठगी की कुल रकम और पिछली घटनाओं की जानकारी जुटाने में लगी है।





