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बिहार में पेपर लीक पर लगेगी लगाम

Kavita2
24 Aug 2026 9:21 AM IST
बिहार में पेपर लीक पर लगेगी लगाम
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पटना। बिहार में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह समिति राज्य के विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं की मौजूदा प्रक्रिया का अध्ययन कर सुधार के उपाय सुझाएगी।

रविवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक विशेषज्ञ समिति को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं सौंपनी होंगी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो और परीक्षा से लेकर परिणाम जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाई जा सके।

पांच सदस्यीय समिति परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसमें परीक्षा कैलेंडर तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र निर्माण, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के लिए तकनीकी तथा प्रशासनिक उपाय शामिल होंगे। इसके अलावा समिति विभिन्न भर्ती एजेंसियों में वर्तमान समय में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं का भी अध्ययन करेगी और जरूरत के मुताबिक उनमें बदलाव की अनुशंसा करेगी।

पेपर लीक की घटनाएं प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती हैं। किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र समय से पहले बाहर आने पर लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत प्रभावित होती है। कई बार परीक्षा रद्द होने या दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने से अभ्यर्थियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार की कोशिश है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।

विशेषज्ञ समिति इस बात पर भी विचार करेगी कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया को किस तरह अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, डिजिटल निगरानी, गोपनीय सामग्री तक सीमित पहुंच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही जैसे उपायों पर भी समिति सुझाव दे सकती है। हालांकि अंतिम व्यवस्था समिति की अनुशंसाओं और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

समिति परीक्षा कैलेंडर को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव देगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए समय पर परीक्षा आयोजित होना और पहले से स्पष्ट कैलेंडर उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। निर्धारित समय पर परीक्षा नहीं होने या तारीखों में बार-बार बदलाव से अभ्यर्थियों की तैयारी प्रभावित होती है। ऐसे में समिति यह अध्ययन करेगी कि विभिन्न आयोगों और भर्ती एजेंसियों की परीक्षाओं को व्यवस्थित तरीके से निर्धारित समय पर कैसे कराया जा सकता है।

प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता भी समिति के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। कई परीक्षाओं में प्रश्नों की त्रुटियों, गलत उत्तर विकल्प, अनुवाद की समस्या या उत्तर कुंजी को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों के कारण परिणाम जारी करने में देरी और कानूनी विवाद की स्थिति भी बन सकती है। विशेषज्ञ समिति प्रश्नपत्र निर्माण और उसकी जांच की ऐसी व्यवस्था सुझा सकती है, जिससे गलतियों की संभावना न्यूनतम की जा सके।

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। नकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल और बाहरी हस्तक्षेप जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों के चयन, निगरानी और वहां तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी समिति अपनी अनुशंसाएं दे सकती है।

राज्य में विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और भर्ती एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर परीक्षाओं का आयोजन करती हैं। ऐसे में समिति यह भी देखेगी कि परीक्षा संचालन के लिए न्यूनतम साझा मानक बनाए जा सकते हैं या नहीं। यदि परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए एक समान मानक लागू होते हैं तो विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

सरकार के इस कदम को युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी या पेपर लीक होने पर उनकी वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार की कोशिश परीक्षा प्रणाली में अभ्यर्थियों का विश्वास बढ़ाने की है।

पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद समिति की सिफारिशों का अध्ययन कर सरकार परीक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलावों पर निर्णय ले सकती है। यदि अनुशंसाओं के आधार पर ठोस सुधार लागू किए जाते हैं तो प्रश्नपत्र की गोपनीयता से लेकर परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और समयबद्ध भर्ती तक पूरी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल विशेषज्ञ समिति के गठन के साथ बिहार में परीक्षा सुधार की दिशा में प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब नजर समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों पर रहेगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू कर ऐसी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की होगी, जिसमें पेपर लीक और गड़बड़ी की गुंजाइश कम से कम हो तथा योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके।

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