बिहार

गंगा के कटाव से राघोपुर में दहशत, घर छोड़ने को मजबूर ग्रामीण

nidhi
10 Oct 2026 9:29 AM IST
गंगा के कटाव से राघोपुर में दहशत, घर छोड़ने को मजबूर ग्रामीण
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राघोपुर में कटाव का कहर

खरीक (भागलपुर): बिहार के राघोपुर गांव में नदी के कटाव का खतरा ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। कटाव की आशंका के बीच लोग अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे हैं। जिन घरों में कभी परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी, वहां अब असुरक्षा का माहौल है। ग्रामीणों के सामने अपने परिवार, सामान और वर्षों की मेहनत से बनाए आशियाने को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

कटाव प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल है। घर छोड़ना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता, लेकिन जब जमीन और मकान पर खतरा मंडराने लगे, तो सुरक्षा को प्राथमिकता देनी पड़ती है। इसी वजह से कई ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने घरों से निकल रहे हैं। नदी के कटाव से प्रभावित इलाकों में जमीन का लगातार क्षरण आसपास बसे परिवारों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इससे न केवल घरों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, बल्कि लोगों के रहने, आने-जाने और रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ता है। राघोपुर के ग्रामीणों की चिंता भी इसी खतरे को लेकर है।
कटाव का खतरा बढ़ने के साथ ग्रामीण अपने जरूरी सामान, बिस्तर और घरेलू वस्तुओं को समेटकर ऊंचे स्थानों की ओर जा रहे हैं। परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को सुरक्षित रखने की है। कई लोगों के लिए अपना घर छोड़ना मजबूरी बन गया है, क्योंकि नदी के बढ़ते कटाव के बीच उन्हें अपने आशियाने की सुरक्षा को लेकर डर सता रहा है।
पलालपुर, शंकरपुर और ननकार गांवों पर संकट
भागलपुर जिले की राघोपुर पंचायत में गंगा नदी के कटाव का असर पलालपुर, शंकरपुर और ननकार गांवों में देखा जा रहा है। कटाव का दायरा बढ़ने से इन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण परिवार और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। इस स्थिति में लोगों के लिए रहने की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है।
150 साल पुराना मंदिर भी नदी में समाया
कटाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 150 साल पुराना मंदिर और एक पुराना पीपल का पेड़ भी गंगा नदी में समा गया है। यह घटना इलाके में कटाव के प्रभाव को दर्शाती है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटाव इसी तरह जारी रहा, तो घरों और आसपास की जमीन को और नुकसान पहुंच सकता है।
तटबंध की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
राघोपुर क्षेत्र में गंगा के कटाव के साथ तटबंध की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। तटबंध प्रभावित होने की स्थिति में आसपास के गांवों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि कटाव को रोकने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। फिलहाल, ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी काम अपने परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाना है। कटाव की मार झेल रहे परिवारों के सामने अब भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हैं। जिन घरों को बनाने में वर्षों की मेहनत लगी, उन्हें छोड़कर जाना लोगों के लिए भावनात्मक और आर्थिक रूप से कठिन है। सुरक्षित ठिकानों की ओर जा रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि हालात सुधरेंगे और उन्हें अपने घरों को बचाने तथा दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने का अवसर मिलेगा।

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