
बिहार : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बापू सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों के लिए नियुक्त 2,451 सहायक प्राध्यापकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने सहायक प्राध्यापकों से पूरी प्रतिबद्धता, ईमानदारी और मनोयोग के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा में पाठ्यक्रम पूरा करने या विद्यार्थियों को किसी विषय का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सोच, व्यवहार और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों को सही दिशा देने के साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने पद को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से नवसृजित डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों के बाद कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देने में सहायता मिलेगी। उन्मुखीकरण कार्यक्रम के माध्यम से नवनियुक्त शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारियों, शैक्षणिक कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों के प्रति उत्तरदायित्व से परिचित कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य ने एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेजों को शुरू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर एक साथ डिग्री कॉलेजों की शुरुआत करने वाला यह देश का पहला राज्य है। इससे उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी अपने आसपास स्नातक स्तर की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने घर से दूर शहरों में जाना पड़ता है। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत से स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा विकसित होगी। इससे अधिक से अधिक विद्यार्थी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे और रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्वयं को तैयार कर पाएंगे।
सम्राट चौधरी ने नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों से कहा कि वे कॉलेजों में नियमित रूप से उपस्थित रहें और विद्यार्थियों से संवाद बनाए रखें। विद्यार्थियों की शैक्षणिक कठिनाइयों को समझना और उनका समाधान करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां विद्यार्थी बिना किसी झिझक के प्रश्न पूछ सकें और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकें। शिक्षकों को बदलते समय और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के अनुरूप स्वयं को भी लगातार विकसित करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान की भूमि रहा है। यहां की शैक्षणिक और बौद्धिक परंपरा ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। राज्य की इसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों पर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार कर राज्य एक बार फिर ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है।
उन्होंने सहायक प्राध्यापकों से विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाने का आग्रह किया। विद्यार्थियों में तार्किक सोच, नवाचार, शोध और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। शिक्षक अपने आचरण और कार्यशैली से विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसलिए उनके व्यवहार में निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता दिखाई देनी चाहिए।
उन्मुखीकरण कार्यक्रम को उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को कॉलेज प्रशासन, अध्यापन की आधुनिक पद्धतियों, विद्यार्थियों के मूल्यांकन और शैक्षणिक अनुशासन से जुड़े विषयों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे नए कॉलेजों में पढ़ाई की शुरुआत से ही एक व्यवस्थित शैक्षणिक ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।
नवसृजित कॉलेजों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की संभावना है। हालांकि इन कॉलेजों की सफलता शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर निर्भर करेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक अपनी योग्यता और मेहनत से विद्यार्थियों का भविष्य संवारने तथा राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्रिय योगदान देंगे।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। नए कॉलेजों और नवनियुक्त शिक्षकों के माध्यम से सरकार उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने सभी सहायक प्राध्यापकों से इस अभियान में भागीदार बनने और ज्ञान की भूमि की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।





